भारतीय संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule of Indian Constitution in Hindi)

भारतीय संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule of Indian Constitution) भारतीय संघीय संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पूर्वोत्तर भारत के स्वायत्त जिला परिषदों और क्षेत्रीय परिषदों की संरचना और कार्यप्रणाली को परिभाषित करता है। यह अनुसूची संविधान के अनुच्छेद 244(2) और 275(1) के तहत लागू होती है और असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों में आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासन के लिए विशेष प्रावधान करती है।

भारतीय संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule of Indian Constitution in Hindi):

छठी अनुसूची का मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान की सुरक्षा और उनके विकास को सुनिश्चित करना है। इसके तहत स्वायत्त जिला परिषदें (Autonomous District Councils) और स्वायत्त क्षेत्रीय परिषदें (Autonomous Regional Councils) स्थापित की गई हैं, जो स्थानीय स्वशासन और विकास के लिए जिम्मेदार होती हैं।

छठी अनुसूची के प्रावधान

छठी अनुसूची में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं जो इन क्षेत्रों में प्रशासनिक स्वायत्तता प्रदान करते हैं:

  1. स्वायत्त जिला और क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना: इन परिषदों को प्रशासनिक, न्यायिक, और विधायी शक्तियां प्रदान की गई हैं। ये परिषदें संबंधित राज्यों के राज्यपाल द्वारा अधिसूचित की जाती हैं।
  2. विधायी शक्तियां: स्वायत्त जिला परिषदें और क्षेत्रीय परिषदें भूमि, वन, जल संसाधन, कृषि, पशुपालन, स्वास्थ्य, शिक्षा, और अन्य क्षेत्रों में कानून बना सकती हैं।
  3. करारोपण की शक्ति: इन परिषदों को करारोपण, कर संग्रह, और कर प्रबंधन की शक्ति दी गई है, जिससे वे अपने क्षेत्रों के आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकती हैं।
  4. न्यायिक शक्तियां: परिषदों को स्थानीय विवादों के निपटान के लिए न्यायालय स्थापित करने का अधिकार दिया गया है, जो पारंपरिक कानूनों और रीति-रिवाजों के आधार पर निर्णय लेते हैं।
  5. वित्तीय प्रावधान: केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे इन क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए धन की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।

छठी अनुसूची के तहत स्थापित स्वायत्त परिषदें

भारतीय संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule of Indian Constitution) के तहत विभिन्न राज्यों में स्थापित स्वायत्त परिषदों का विवरण इस प्रकार है:

  1. असम: असम में तीन स्वायत्त जिला परिषदें हैं – कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद, दीमा हसाओ स्वायत्त परिषद, और बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद।
  2. मेघालय: मेघालय में तीन स्वायत्त जिला परिषदें हैं – गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद, जयंतिया हिल्स स्वायत्त जिला परिषद, और खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद।
  3. त्रिपुरा: त्रिपुरा में त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद स्थापित है, जो राज्य के जनजातीय क्षेत्रों के विकास और प्रशासन के लिए जिम्मेदार है।
  4. मिजोरम: मिजोरम में तीन स्वायत्त जिला परिषदें हैं – चकमा स्वायत्त जिला परिषद, मारा स्वायत्त जिला परिषद, और लई स्वायत्त जिला परिषद।

छठी अनुसूची के लाभ और चुनौतियाँ

छठी अनुसूची ने आदिवासी समुदायों को स्वशासन का अधिकार देकर उनके सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा दिया है। इससे उनकी विशिष्ट पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखने में मदद मिली है।

हालांकि, कुछ चुनौतियाँ भी सामने आई हैं:

  1. विकास और बुनियादी ढाँचे की कमी: कई क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और विकास की कमी है, जिससे लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  2. आर्थिक संसाधनों की सीमितता: स्वायत्त परिषदों के पास आर्थिक संसाधनों की सीमितता होती है, जो विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न कर सकती है।
  3. प्रशासनिक चुनौतियाँ: प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों के प्रबंधन में कई बार चुनौतियाँ सामने आती हैं, जिससे स्थानीय सरकारों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

छठी अनुसूची के सुधार

वर्तमान समय में भारतीय संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule of Indian Constitution) के प्रावधानों में सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है, जिससे इन क्षेत्रों के विकास को और अधिक गति मिल सके। कुछ प्रमुख सुधार सुझाव इस प्रकार हैं:

  1. वित्तीय संसाधनों की वृद्धि: स्वायत्त परिषदों को अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, जिससे वे विकास कार्यों को सुचारू रूप से चला सकें।
  2. प्रशासनिक सुधार: प्रशासनिक ढाँचे में सुधार कर स्थानीय सरकारों को अधिक स्वतंत्रता और अधिकार प्रदान किए जा सकते हैं।
  3. समावेशी विकास: समावेशी विकास की दिशा में कदम उठाते हुए, सभी समुदायों को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने की आवश्यकता है।
  4. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर इन क्षेत्रों में लोगों के जीवन स्तर को सुधारा जा सकता है।

निष्कर्ष

भारतीय संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule of Indian Constitution) ने पूर्वोत्तर भारत के आदिवासी क्षेत्रों के विकास और प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह अनुसूची इन क्षेत्रों के सामाजिक, सांस्कृतिक, और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए प्रावधानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हालांकि, कुछ चुनौतियों और समस्याओं के बावजूद, छठी अनुसूची ने आदिवासी समुदायों की विशिष्ट पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भविष्य में, इन प्रावधानों में सुधार और विकास की दिशा में किए गए प्रयास इन क्षेत्रों को और अधिक समृद्ध और सशक्त बना सकते हैं।

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