अचेतन में उपसर्ग और मूल शब्द? | Achetan me Upsarg aur Mool Shabd

‘अचेतन’ शब्द को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है: ‘अ’ और ‘चेतन’। आइए इन दोनों भागों को विस्तार से समझते हैं:

  1. उपसर्ग (Prefix):
    • ‘अ’ उपसर्ग संस्कृत भाषा में नकारात्मकता को दर्शाने के लिए प्रयोग होता है। यह उपसर्ग किसी भी शब्द के आगे जुड़कर उसके अर्थ को नकारात्मक या विपरीत बना देता है। उदाहरण के लिए, ‘सत्य’ का अर्थ है सत्य, जबकि ‘असत्य’ का अर्थ है असत्य या झूठ।
  2. मूल शब्द (Root Word):
    • ‘चेतन’ मूल शब्द है जिसका अर्थ है ‘सजीव’ या ‘सचेत’। यह शब्द उन सभी चीजों को संदर्भित करता है जो जीवन या जागरूकता से भरी हुई हैं। जैसे कि मनुष्य, जानवर आदि।

अब, ‘अचेतन’ शब्द का निर्माण ‘अ’ उपसर्ग और ‘चेतन’ मूल शब्द को मिलाकर होता है। इसका अर्थ है ‘निश्चित रूप से नहीं चेतन’ या ‘बिना चेतना के’। यह उन स्थितियों या वस्तुओं को संदर्भित करता है जो अचेत, बेहोश या जागरूकता रहित हैं।

अचेतन में उपसर्ग और मूल शब्द क्या है?

अचेतन शब्द में ‘अ’ उपसर्ग और ‘चेतन’ मूल शब्द हैं। ‘अ’ उपसर्ग संस्कृत में नकारात्मकता या विपरीतता को दर्शाने के लिए प्रयोग होता है, जबकि ‘चेतन’ का अर्थ है सजीव या जागरूक। इसलिए, ‘अचेतन’ का अर्थ होता है ‘बिना चेतना के’ या ‘अचेत’।

उदाहरण

  • एक व्यक्ति जो बेहोश हो गया है, उसे हम ‘अचेतन’ कह सकते हैं।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, जब कोई वस्तु या व्यक्ति चेतना की स्थिति में नहीं है, उसे भी ‘अचेतन’ कहा जाता है।

इस प्रकार, ‘अचेतन’ शब्द का उपयोग उन सभी स्थितियों या वस्तुओं के लिए किया जाता है जो चेतना या जागरूकता से रहित हैं।

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