अमित और झील का प्रेत (Ghost Story in Hindi | भूत की कहानी हिंदी में)

अमित को तैराकी का बहुत शौक था। वह अक्सर गाँव के तालाब और नदियों में तैराकी करता था। एक दिन, अमित को गाँव के बाहर एक पुरानी झील के बारे में पता चला। झील बहुत सुंदर थी और उसकी गहराई के कारण उसे ‘अधूरी झील’ भी कहा जाता था। लेकिन गाँव के लोग कहते थे कि वहाँ एक प्रेत का वास है जो लोगों को झील में खींच लेता है। ये कहानियाँ अमित को बस पुरानी दंतकथाएँ लगीं और उसने इन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

पुरानी झील का रहस्य

झील के बारे में सुनकर अमित का मन उस रहस्यमयी जगह को देखने के लिए व्याकुल हो उठा। एक दिन, जब सूरज ढल रहा था और आसमान नारंगी रंग से भर गया था, अमित ने झील पर जाने का निश्चय किया। वह अपनी साइकिल पर सवार होकर झील की ओर चल पड़ा। रास्ते में उसे कुछ बुजुर्ग लोग मिले जिन्होंने उसे वहाँ जाने से मना किया, लेकिन अमित ने उनकी चेतावनी को मजाक में ले लिया और अपनी यात्रा जारी रखी।

जब अमित झील के पास पहुँचा, तो उसे वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता ने मंत्रमुग्ध कर दिया। झील का पानी शांत और स्थिर था, जैसे उसमें कोई हलचल न हो। झील के चारों ओर घने पेड़ थे जो झील को और भी रहस्यमय बना रहे थे। अमित ने अपने कपड़े उतारे और झील में छलांग लगा दी। पानी ठंडा और स्फूर्तिदायक था। तैराकी का आनंद लेते हुए अमित ने गहरे पानी में जाने का निश्चय किया।

प्रेत का आभास

अमित झील के बीचों-बीच पहुँच गया था। अचानक, उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके पैर को पकड़ लिया हो। उसने इसे अपनी कल्पना समझा और तैरते रहा। लेकिन फिर उसे एक ठंडी हवा का झोंका महसूस हुआ और उसने महसूस किया कि उसके चारों ओर पानी की सतह पर हलचल हो रही है। अमित ने डर के मारे तैरना तेज कर दिया, लेकिन उसे लगा जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसे नीचे खींच रही हो।

अदृश्य शक्ति का प्रकोप

अमित ने पूरी ताकत लगाकर झील से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन वह जितना जोर लगाता, उतना ही उसे नीचे खींचा जा रहा था। उसने घबराकर चारों ओर देखा, लेकिन कोई दिखाई नहीं दे रहा था। तभी उसने पानी के नीचे एक साया देखा, जो धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रहा था। साया का चेहरा धुंधला था, लेकिन उसकी आँखें चमक रही थीं, जैसे किसी दुष्ट आत्मा की हों।

अमित ने अपनी पूरी ताकत से चीखने की कोशिश की, लेकिन उसकी आवाज जैसे गले में ही अटक गई। साया ने उसे अपने शिकंजे में कस लिया और अमित ने महसूस किया कि वह धीरे-धीरे पानी के भीतर खींचा जा रहा है। उसने बचने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसकी सारी कोशिशें व्यर्थ हो गईं। पानी के भीतर जाते ही उसे एक अजीब सी ठंडक महसूस हुई और उसकी साँसें रुकने लगीं।

रहस्यमयी आत्मा का प्रकोप

अमित ने देखा कि साया ने उसे एक गहरे अंधकारमय गुफा में खींच लिया है। गुफा में चारों ओर पानी था और वहाँ का वातावरण बहुत डरावना था। साया ने अमित को छोड़ दिया और उसकी ओर देखता रहा। अमित ने डरते-डरते पूछा, “तुम कौन हो और मुझे यहाँ क्यों लाए हो?”

साया ने एक भयानक हंसी हँसते हुए कहा, “मैं इस झील का प्रेत हूँ। वर्षों पहले मैं भी तुम्हारी तरह एक इंसान था। लेकिन एक दुर्घटना में मेरी मौत हो गई और मेरी आत्मा को कभी शांति नहीं मिली। अब मैं इस झील में भटकता रहता हूँ और जो भी यहाँ आता है, उसे अपने साथ ले जाता हूँ।”

अमित ने कांपते हुए पूछा, “क्या मुझे यहाँ से जाने का कोई तरीका है?”

साया ने कहा, “यदि तुम मेरी आत्मा को शांति दिलाने में मेरी मदद कर सको, तो मैं तुम्हें जाने दूँगा।”

प्रेत की कहानी

अमित ने साया से उसकी पूरी कहानी सुनी। साया ने बताया कि वह एक समय में गाँव का एक युवा लड़का था। उसका नाम अर्जुन था और उसे भी तैराकी का बहुत शौक था। एक दिन, जब वह झील में तैर रहा था, तो अचानक एक भयानक तूफान आ गया और वह डूब गया। उसकी आत्मा को कभी शांति नहीं मिली और वह प्रेत बनकर झील में भटकने लगा।

अर्जुन की आत्मा ने अमित से कहा कि उसे शांति दिलाने के लिए उसे गाँव के मंदिर में जाकर विशेष पूजा करनी होगी और उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करनी होगी। अमित ने डरते-डरते उसकी बात मान ली।

आत्मा को शांति दिलाने की कोशिश

अमित ने झील से बाहर आने की बहुत कोशिश की, लेकिन प्रेत ने उसे तभी छोड़ा जब उसने वादा किया कि वह उसकी आत्मा को शांति दिलाने की पूरी कोशिश करेगा। प्रेत ने उसे बताया कि उसे मंदिर में जाकर पवित्र जल से अर्जुन की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करनी होगी।

अमित ने साहस जुटाया और झील से बाहर निकला। वह तेजी से अपने घर गया और अपने माता-पिता को सारी घटना बताई। उन्होंने उसे मंदिर जाने की सलाह दी और साथ ही उसे पवित्र जल भी दिया।

मंदिर में प्रार्थना

अगली सुबह, अमित अपने माता-पिता के साथ मंदिर गया। वहाँ के पुजारी ने उनकी पूरी कहानी सुनी और उन्हें विशेष पूजा का आयोजन करने की सलाह दी। पूजा के दौरान, अमित ने पूरी श्रद्धा से प्रार्थना की और अर्जुन की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

पूजा के बाद, पुजारी ने उन्हें पवित्र जल दिया और कहा कि इसे झील में जाकर अर्जुन की आत्मा को अर्पित करें। अमित ने ऐसा ही किया और झील के किनारे जाकर पवित्र जल अर्पित किया। जैसे ही उसने जल अर्पित किया, उसे एक अजीब सी शांति महसूस हुई।

प्रेत का मोक्ष

अचानक, झील का पानी शांत हो गया और अमित ने देखा कि अर्जुन की आत्मा उसे देख रही है। आत्मा ने एक संतुष्ट मुस्कान के साथ कहा, “तुमने मेरी आत्मा को शांति दिला दी है। अब मैं इस झील से मुक्त हो सकता हूँ। धन्यवाद, अमित।”

अमित ने राहत की साँस ली और अर्जुन की आत्मा ने धीरे-धीरे झील से विदा ले ली। उसके बाद, झील का पानी फिर से सामान्य हो गया और वहाँ की डरावनी घटनाएँ समाप्त हो गईं।

नयी शुरुआत

इस घटना के बाद, अमित ने झील के पास जाने से तौबा कर ली। उसने गाँव वालों को भी इस घटना के बारे में बताया और सभी ने मंदिर में विशेष पूजा कराई ताकि अर्जुन की आत्मा को पूर्ण शांति मिल सके। गाँव के लोगों ने झील को एक पवित्र स्थान मान लिया और वहाँ की देखभाल करने लगे।

अमित ने तैराकी करना तो बंद नहीं किया, लेकिन उसने यह वादा किया कि वह कभी भी उन जगहों पर नहीं जाएगा जहाँ लोगों ने उसे मना किया हो। इस घटना ने उसे सिखाया कि पुरानी कहानियों और दंतकथाओं में भी सच्चाई हो सकती है और हमें उनका सम्मान करना चाहिए।

अर्जुन की आत्मा को शांति मिलने के बाद, झील फिर से एक सुंदर और शांतिपूर्ण जगह बन गई। अब लोग वहाँ बिना किसी डर के जाते और झील की सुंदरता का आनंद लेते। अमित ने अपनी इस अनुभव से बहुत कुछ सीखा और वह एक जिम्मेदार और समझदार व्यक्ति बन गया।

इस तरह, अमित और झील का प्रेत की कहानी ने गाँव के लोगों को यह सिखाया कि हमें पुरानी कहानियों और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए और कभी भी किसी रहस्यमयी स्थान की ओर बिना सोचे-समझे कदम नहीं बढ़ाना चाहिए।

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