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नास्त्रेदमस कौन थे और उन्होंने क्या भविष्यवाणियाँ की थी? biography of nostradamus in Hindi, नास्त्रेदमस की जीवनी

biography of nostradamus in Hindi

नास्त्रेदमस कौन थे (Who is Nostradamus):

नास्त्रेदमस, फ्रांसीसी ज्योतिषी (भविष्यवक्ता) और चिकित्सक थे। नास्त्रेदमस पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हुए तो इसका कारण था उनके द्वारा की गयी भविष्यवाणियाँ जो की बिलकुल सटीक होती थी। आज भी उनके द्वारा की गई भविष्यवाणियाँ सच होती है।

फ्रांसीसी क्रांति से लेकर इतिहास की कई सटीक घटनाओं की भविष्यवाणी करने का श्रेय उनकी मृत्यु के बाद आज भी नास्त्रेदमस को दिया जाता है।

नास्त्रेदमस ने अपने समय से काफ़ी आगे की भविष्यवाणियाँ की थी जो कि सच साबित हुई। जैसे की अमेरिका में हुए 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमले की भविष्यवाणी, एडॉल्फ हिटलर के उदय बारे में यहाँ तक की कुछ लोगों का कहना है की इस साल (2020) में फैले कोरोना वायरस के बारे में भी नास्त्रेदमस ने काफ़ी पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी।

उनकी किताब द प्रोफेसीज (The Prophecies) 1555 में प्रकाशित हुई थी। The Prophecies के प्रकाशन के बाद ही नास्त्रेदमस को पूरी दुनिया में ख्याति मिली। आपको बता दें की नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी के अनुसार वर्ष 3797 में दुनिया खत्म हो जाएगी। दुनिया ख़त्म होने का मतलब इस पृथ्वी पर किसी तरह जीवन नही बचेगा “मानव सभ्यता पूरी तरह मिट जाएगी”।

नास्त्रेदमस का प्रारंभिक जीवन :

नास्त्रेदमस का जन्म 14 दिसंबर या 21 दिसंबर, 1503 को फ्रांस के दक्षिण में सेंट-रेमी-डी-प्रोवेंस (Saint-Remy-de-Provence) में हुआ था। उनकी जन्म तिथि को लेकर इतिहासकारों को सही जानकारी नही है। क्योंकि उनके जन्म तिथि के बारे में कहीं नही लिखा गया। इन दोनों तारीख़ों (14 दिसंबर या 21 दिसंबर) को उनका जन्म माना जाता है।

  • नास्त्रेदमस के बचपन का नाम मिशेल डी नोस्ट्राडेम (Michel de Nostradame) था।
  • नास्त्रेदमस अपने माता पिता की नौ संतानों में से एक थे।
  • नास्त्रेदमस की माँ का नाम – रेनियर डी सेंट-रेमी (Reyniere de St-Remy) था।
  • नास्त्रेदमस के पिता का नाम – जैम डी नोस्ट्राडेमे (Jaume de Nostradame) था।
  • नास्त्रेदमस के परिवार वाले अनाज व्यापारी और यहूदी वंश का अंशकालिक नोटरी (part-time notary of Jewish descent) थे।
  • नास्त्रेदमस के दादा का नाम गाइ गैसोनेट (Guy Gassonet) था।
  • नास्त्रेदमस के जन्म से आधी सदी पहले उनके दादा गाइ गैसोनेट ने कैथोलिक धर्म अपना लिया था। कैथोलिक धर्म अपनाने के बाद उत्पीड़न से बचने के लिए उन्होंने अपने परिवार के उपमान (surname) में नोस्ट्राडेम (Nostradame) जोड़ लिया था।
  • नास्त्रेदमस के बचपन के बारे में इतिहास में बहुत कम जानकारी है। लेकिन इतिहासकारों को जो सबूत मिले हैं उनके अनुसार नास्त्रेदमस बचपन से ही बहुत बुद्धिमान थे।
  • नास्त्रेदमस के नाना का नाम जीन डे सेंट रेमी (Jean de St. Remy) था। नास्त्रेदमस अपने नाना से बहुत ज़्यादा प्रभावित थे।
  • नास्त्रेदमस के नाना जीन डे सेंट रेमी बचपन से ही अपने पोते नास्त्रेदमस को बुद्धिमान और विलक्षण प्रतिभा का धनी मानते थे।
  • नास्त्रेदमस को बचपन में ही लैटिन, ग्रीक, हिब्रू और गणित के बारे में बहुत कुछ पढ़ाया और सिखाया गया था। इस वजह से नास्त्रेदमस इन विषयों के महान ज्ञाता बन गए थे।

यह माना जाता है कि नास्त्रेदमस के दादाजी ने उन्हें यहूदी परंपरा के प्राचीन संस्कार के साथ ज्योतिष विज्ञान और खगोलीय विज्ञान सिखाया था। नास्त्रेदमस को उनके दादा ही स्वर्ग के बारे में बताते थे। उनके दादा ही बताते थे की भगवान और स्वर्ग मानव जीवन को कैसे चलाते हैं।

नास्त्रेदमस की शिक्षा :

नास्त्रेदमस ने केवल 14 साल की उम्र में medicine का अध्ययन करने के लिए एविग्नन विश्वविद्यालय (University of Avignon) में प्रवेश ले लिया था। हालाँकि बुबोनिक प्लेग (Bubonic Plague) के प्रकोप के कारण उन्हें एक वर्ष के बाद विश्वविद्यालय छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था।

नास्त्रेदमस के स्वयं के लिखे नोट के अनुसार – उन्होंने इस बुबोनिक प्लेग के प्रकोप के दौरान पूरे देश में यात्रा की, हर्बल उपचार पर शोध किया और एपोथेकरी (औषधि बेचने वाला) के रूप में भी काम किया।

इसके बाद 1522 में नास्त्रेदमस ने मेडिसिन में डॉक्टरेट (doctorate in medicine) की पढ़ाई पूरी करने के लिए मोंटेपेलियर विश्वविद्यालय (University of Montpelier) में प्रवेश लिया।

नास्त्रेदमस के बारे में इतिहासकारों का कहना है की वो कभी कभी Catholic Priests (कैथोलिक पादरियों) द्वारा दी जाने वाली शिक्षा में असंतोष व्यक्त कर देते थे। इसका कारण था की उस समय कैथोलिक पादरी ज्योतिष की उनकी धारणाओं को खारिज कर देते थे।

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कुछ रिपोर्टें के अनुसार विश्वविद्यालय के अधिकारियों को जब ये पता चल की नास्त्रेदमस पहले एपोथेकरी (औषधि बेचने वाला) के रूप में काम करते थे। तो उन्होंने नास्त्रेदमस को यूनिवर्सिटी से निष्कासित कर दिया। ज़ाहिर तौर पर कहा जा सकता है की यूनिवर्सिटी ने किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोच लिया होगा जो “Manual Trade” में शामिल रहा हो। हालाँकि, इस बारे में भी इतिहासकारों में विवाद है।

क्योंकि कई सोर्सेज़ से यही पता चलता है कि नास्त्रेदमस को यूनिवर्सिटी से निष्कासित नहीं किया गया था और 1525 में उन्हें चिकित्सा का अभ्यास करने के लिए लाइसेंस प्दे दिया गया था।

इसी समय, उन्होंने अपने नाम का लैटिनीकरण किया और अपने नाम Nostradame को बदल कर Nostradamus (नास्त्रेदमस) रख लिया। नाम में परिवर्तन करना मध्यकालीन शिक्षाविदों का रिवाज था। इसीलिए रिवाज के अनुसार उन्होंने भी अपने नाम में परिवर्तन कर लिया था।

नास्त्रेदमस और प्लेग महामारी :

अगले कई वर्षों में नास्त्रेदमस ने प्लेग के पीड़ितों का इलाज करते हुए पूरे फ्रांस और इटली की यात्रा की। उस समय प्लेग का कोई इलाज नहीं था। अधिकांश डॉक्टर पारा (mercury) से बनी औषधि पर भरोसा करते थे। रोगियों के बहते ख़ून को साफ़ करके उनको लहसुन के पेस्ट से लथपथ कपड़े की पट्टी बाँधी जाती थी।

नास्त्रेदमस ने प्लेग से निपटने के लिए कुछ बहुत ही अच्छे तरीके विकसित किए थे। उन्होंने स्वच्छता बनाने और शहर की सड़कों से संक्रमित लाशों को निकालने के लिए प्रोत्साहित किया।

नास्त्रेदमस ने प्लेग के इलाज के लिए एक “Rose Pill” भी बनाई थी। यह Rose Pill, गुलाब से बना एक हर्बल लोज़ेंग था। यह विटामिन सी से भरपूर था जिससे प्लेग के हल्के लक्षण वाले रोगियों के लिए कुछ राहत प्रदान करता था।

उनका इलाज काफ़ी प्रभावशाली था, इसलिए उनके ज़्यादातर मरीज़ ठीक भी हुए थे। हालांकि इसके लिए भी याद किया जा सकता है कि वो अपने रोगियों को साफ रखने, कम वसा वाले आहार का सेवन करने और ताजी हवा प्रदान करवाने के लिए बहुत कुछ करते थे।

प्लेग के पीड़ितों का बेहतर इलाज करने के कारण नास्त्रेदमस स्थानीय सेलिब्रिटी के रूप में विख्यात हो गए थे। और उन्हें प्लेग के इलाज के लिए प्रोवेंस के कई नागरिकों से वित्तीय सहायता भी मिली थी।

1531 में, उन्हें दक्षिण-पश्चिम फ्रांस (एजेन) के उस समय के एक प्रमुख विद्वान (scholar) जुलेस-सीजर स्कैलिगर (Jules-Cesar Scaliger) के साथ काम करने के लिए आमंत्रित किया गया था। एजेन में ही नास्त्रेदमस ने शादी की थी और अगले कुछ सालों में उनके दो बच्चे हुए।

1534 में जब नास्त्रेदमस एक चिकित्सा मिशन के लिए इटली गए हुए थे। उसी समय में उनकी पत्नी और बच्चों की मृत्यु हो गई (संभवतः प्लेग के कारण)। अपनी पत्नी और बच्चों को बचाने में सक्षम नहीं होने के कारण उन्हें समुदाय में और अपने संरक्षक स्केलेगर के साथ एहसान करना पड़ा।

अपनी पत्नी और बच्चों को बचाने में सक्षम नहीं होने के कारण उन्हें समुदाय में और अपने संरक्षक स्कैलिगर (Scaliger) के सामने शर्मिंदा होना पड़ा था।

नास्त्रेदमस का गुप्त एकांत जीवन:

1538 में एक धार्मिक मूर्ति के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने के कारण नास्त्रेदमस के खिलाफ धर्म का अपमान करने के आरोप लगे। उन्हें चर्च के सामने पेश होने का आदेश दिया गया। ऐसे में उन्होंने बुद्धिमानी से प्रांत छोड़ने का विकल्प चुना और इसके बाद इटली, ग्रीस, तुर्की जैसे देशों में कई वर्षों तक यात्रा की।

उनके इस रहस्यमय जीवन और यात्रा के बारे में कहा जाता है की इसी यात्रा के दौरान उन्होंने मानसिक जागृति का अनुभव किया।

एक किंवदंती कहती है की नास्त्रेदमस इसी गुप्त यात्रा के दौरान अपने मित्र के साथ इटली की सड़कों पर टहल रहे थे। तब सड़क पर उन्हें फ्रांसिस्क भिक्षुओं का एक समूह दिखा। इस समूह में से नास्त्रेदमस ने एक व्यक्ति को आदर से नमस्कार किया। उनके मित्र द्वारा इसका कारण पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह इंसान भविष्य में पोप के रूप में ख्याति प्राप्त करेगा। किंवदंती के अनुसार यह कहा जाता है की वह इंसान फेलिस पेरेटी (Felice Peretti) था जिसे 1585 में पोप चुना गया था। नास्त्रेदमस के बारे में ऐसी ही कई किंवदंतियाँ फैली हुई हैं।

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जब नास्त्रेदमस को लगा कि वो अब न्यायिक जांच से सुरक्षित हैं, तब उन्होंने प्लेग पीड़ितों के इलाज को फिर से शुरू करने के लिए रांस लौट आए। 1547 में, नास्त्रेदमस अपने गृह नगर सलोन-डी-प्रांत (Salon-de-Province) में बस गए और ऐनी पोंसार्डे (Anne Ponsarde) नाम की एक अमीर विधवा से विवाह कर लिया। ऐनी पोंसार्डे और नास्त्रेदमस को 6 बच्चे हुए, जिनमे से तीन लड़के थे और तीन लड़कियाँ।

इन्ही सालों में चिकित्सा विज्ञान (medical science) से जुड़ी उनकी दो पुस्तकें प्रकाशित हुई। इनमे से एक बुक Roman physician (रोमन चिकित्सक) की Galen का अनुवाद थी। और दूसरी बुक “द ट्राईट देस फर्डेमेंस” (Traite des Fardemens) प्लेग के इलाज और सौंदर्य प्रसाधनों की तैयारी (Preparation of Cosmetics) के लिए थी।

अपने गृह नगर सलोन में बसने के कुछ वर्षों के भीतर, नास्त्रेदमस दवा से दूर होने लगे और मनोगत (रहस्यमय जीवन) की ओर बढ़ गए। ऐसा कहा जाता है कि वह रात में अपने अध्ययन के दौरान घंटों पानी और जड़ी-बूटियों से भरे कटोरे के सामने ध्यान लगाकर बिताते थे। माना जाता है उनका यही ध्यान उनकी भविष्यवाणियों का आधार थे।

1550 में, नास्त्रेदमस ने ज्योतिषीय जानकारी और आने वाले वर्ष की भविष्यवाणियों के बारे में अपना पहला पंचांग लिखा। उनके यह पंचांग उस समय बहुत लोकप्रिय थे, क्योंकि उन्होंने इनमे किसानों और व्यापारियों के लिए उपयोगी जानकारी प्रदान की थी। स्थानीय लोककथाओं के साथ आने वाले वर्षों के लिए भविष्यवाणियाँ भी इनमे दी जाती थी।

इसके बाद नास्त्रेदमस अपने विजन के बारे में लिखना शुरू किया और उन्हें अपने इस पंचांग में शामिल किया। उनके इस प्रकाशन को एक शानदार प्रतिक्रिया मिली, और इससे नास्त्रेदमस पूरे फ्रांस में विख्यात हो गए। इससे नास्त्रेदमस को और अधिक लिखने के लिए प्रोत्साहित हुए।

नास्त्रेदमस के दर्शन (vision) और भविष्यवाणी :

1554 तक, नास्त्रेदमस के दर्शन (vision) पंचांगों का एक अभिन्न हिस्सा बन गए थे। इसके बाद नास्त्रेदमस ने अपनी सारी ऊर्जाओं को एक विशाल ग्रंथ में एक साथ लिखने का फ़ैसला किया। उन्होंने इसके 10 खंड (Volumes) लिखने की योजना बनाई, उनकी योजना इनमे अगले 2,000 वर्षों के लिए 100 भविष्यवाणियों (Predictions) शामिल करने की थी।

1555 में उन्होंने अपने प्रमुख, दीर्घकालिक भविष्यवाणियों का एक संग्रह “Les Prophesies” प्रकाशित किया। लेकिन उन्होंने इनके अर्थों को अस्पष्ट रूप से लिखा था। नास्त्रेदमस संभवतः धार्मिक संवेदनशीलता को ध्यान में रख कर ऐसा किए थे।

इसके लिए उन्होंने एक तरीका तैयार किया, जिसमें चार-पंक्ति के छंदों का उपयोग किया गया था साथ में इनमे ग्रीक, इतालवी, लैटिन और प्रोवेनकल (दक्षिणी फ्रांस की एक बोली) भाषाओं को एक साथ मिलाकर लिखा गया था।

अजीब बात है कि नास्त्रेदमस के रोमन कैथोलिक चर्च के साथ अच्छे संबंध थे। इसी कारण 1538 में उनके द्वारा एक धार्मिक मूर्ति के बारे में अपमानजनक टिप्पणी किए जाने को लेकर दोबारा कोई मुद्दा नही उठा और उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नही की गयी। इसके बाद उनकी लोकप्रियता बढ़ती चली गई और आगे आने वाले सालों में नास्त्रेदमस प्रसिद्ध व्यक्तियों में शामिल हो गए।

नास्त्रेदमस अपनी भविष्यवाणियों के साथ कुछ विवादों में फँसे, क्योंकि कुछ लोगों ने सोचा कि वह शैतान के नौकर (Servant of the Devil) हैं। वहीं कुछ लोग उन्हें पागल कहने लगे। हालाँकि, कई लोगों का ये भी मानना ​​था कि भविष्यवाणियाँ आध्यात्मिक रूप से प्रेरित थीं।

फिर भी नास्त्रेदमस यूरोप में फ़ेमस थे। इसके साथ ही कई धनी लोग उनसे अपना और अपने परिवार का भविष्य जानना चाहते थे। नास्त्रेदमस के प्रशंसकों में से एक रांस के राजा हेनरी द्वितीय की पत्नी “कैथरीन डी मेडिसी” भी थी। 1555 के उनके पंचांगों को पढ़ने के बाद, वो अपने परिवार के बारे में जानने और बच्चों की कुंडली बनवाने के लिए नास्त्रेदमस को पेरिस बुलाया। कुछ साल बाद, उन्होंने नास्त्रेदमस को किंग हेनरी के दरबार में काउंसलर और फिजिशियन-इन-ऑर्डिनरी बना दिया।

1556 में, राजा की सेवा करते हुए नास्त्रेदमस ने सदियों पहले की गई एक और भविष्यवाणी को भी समझाया, जिसे राजा हेनरी के संदर्भ में माना गया था। भविष्यवाणी के अनुसार एक “युवा शेर” के बारे में बताया, जो युद्ध के क्षेत्र में वृध्द शेर को मात देगा। युवा शेर वृद्ध की आंख में छेद करेगा और वृध्द शेर घातक मौत मारा जाएगा।

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इसके बाद नास्त्रेदमस ने राजा को चेतावनी दी कि उन्हें समारोहों में जाने और उनका आयोजन करने से बचना चाहिए। तीन साल बाद, जब राजा हेनरी 41 साल के थे, तब उनका एक घुड़सवार भाला-युद्ध मैच में निधन हो गया। इस भाला-युद्ध मैच में उनके प्रतिद्वंद्वी ने राजा के सिर को में भाला मार दिया और वह राजा की आँख से सीधे उनके सिर में प्रवेश किया। इसके बाद राजा 10 दिन तक तड़पते हुए ज़िंदा थे और अंत में संक्रमण से उनकी मृत्यु हो गई।

नास्त्रेदमस ने दावा किया की उनकी भविष्यवाणियों को आधार न्यायिक ज्योतिष (भविष्य की घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने की कला) है जिसमें पृथ्वी के संबंध में ग्रहों और तारकीय निकायों की गणना के द्वारा भविष्य की घटनाओं का पूर्वानुमान लगाया जाता है।

वास्तव में, कई विद्वानों का मानना है कि उन्होंने विश्व के अंत की भविष्यवाणियाँ (बाइबिल से) की हैं। आपको बता दें की नास्त्रेदमस के पास भविष्यवाणियों को लेकर कोई सबूत नहीं था। पेशेवर ज्योतिषियों द्वारा भी उनकी आलोचना की गई थी। उनका मानना था कि तुलनात्मक कुंडली का अध्ययन करके (पिछली घटनाओं के साथ भविष्य के ग्रहों की तुलना करके) भविष्य की भविष्यवाणी कर सकते हैं।

नास्त्रेदमस की मृत्यु कैसे हुई? How Did Nostradamus Die?

नास्त्रेदमस वात रोग “गठिया” से पीड़ित थे। जीवन के अंतिम वर्षों में, उनकी स्थिति एडिमा या ड्रॉप्सी में बदल गई, जहां असामान्य मात्रा में द्रव त्वचा के नीचे या शरीर के गुहाओं (cavities) के भीतर जमा हो जाता है।

उपचार ना मिल पाने के कारण उनका हार्ट फ़ेल (heart failure) हो गया। 1566 के जून के अंत में, नास्त्रेदमस ने अपने वकील को अपनी विरासत पत्नी और बच्चों के नाम करने के लिए कहा। 1 जुलाई 1566 की शाम को, उन्होंने अपने सचिव “जीन डे च्वेंग” (Jean de Chavigny) से कहा – आप मुझे सुबह तक जीवित नहीं पाएँगे। कथित तौर अगली सुबह नास्त्रेदमस अपने बिस्तर के बगल में फर्श पर मृत पाए गए।

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों की सच्चाई:

नास्त्रेदमस अपने जीवनकाल के अधिकांश समय तक भूकंप, युद्ध, बाढ़, आक्रमण, हत्या, सूखा, लड़ाई और प्लेग जैसी आपदाओं से निपटते रहे। कुछ उत्साही लोगों ने नास्त्रेदमस को फ्रांसीसी क्रांति सहित विश्व इतिहास में कई घटनाओं की भविष्यवाणी करने का श्रेय दिया। जैसे की नेपोलियन और हिटलर का उदय, परमाणु बम का विकास, JFK की हत्या, 11 सितंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकवादी हमला।

अभी हाल ही में, कुछ उत्साही लोगों ने ये भी दावा किया कि नास्त्रेदमस ने COVID-19 (कोरोना वायरस) की भविष्यवाणी भी कई सदियों पहले ही कर दी थी।

नास्त्रेदमस की लोकप्रियता इस कारण से है की उनके लेखन में अस्पष्टता थी और उन्होंने किसी भी तिथि (तारीख) या वर्ष के बारे में नही बताया था। उनकी इसी कमी के कारण किसी भी बड़ी घटना को कुछ लोगों द्वारा नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों से जोड़ दिया जाता है। और इनके सच होने का दावा कर दिया जाता है।

कुछ विद्वानों का मानना है कि नास्त्रेदमस भविष्यवक्ता बनने के लिए नहीं लिख रहे थे बल्कि अपने समय और उस समय की घटनाओं पर टिप्पणी करने के लिए लिख रहे थे।

आज के लिए बस इतना ही अगली पोस्ट में हम आपको बताएँगे की नास्त्रेदमस ने भारत को लेकर क्या भविष्यवाणियाँ की थी? तब तक के लिए NioDemy परिवार से जुड़े रहें।

हमें आशा है कि आपको ये लेख पसंद आया होगा और इससे आपको आज की डिजिटल और ग़लत ख़बरों के बीच इतिहास की कुछ सही जानकारी मिली होगी। आज की दुनिया और इतिहास से जुड़ी कोई भी जानकारी पाना चाहते हैं तो comment करके ज़रूर बताएँ। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ Whatsapp और Facebook जैसे सोशल मीडिया में share करना ना भूलें ताकि उन्हें भी सच्चाई पता चल सके। धन्यवाद!

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