Chambal Express Way : 3970 करोड़ रुपए की लागत से चंबल एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जाएगा। चंबल एक्सप्रेस-वे मध्य प्रदेश के गडोरा (मुरैना) से राजस्थान के कोटा तक जाएगा। चंबल एक्सप्रेस वे को केंद्र सरकार की भारत माला परियोजना के तहत बनने वाले इस चंबल एक्सप्रेस वे की लम्बाई 320 किलोमीटर होगी।

इससे पहले बनाए गए प्रोजेक्ट में चंबल एक्सप्रेस को मुरैना जिले के गड़ोरा गांव (मुरैना सिटी से 15 किमी दूर) के पास से श्योपुर तक ही बनाया जाना था, तब चंबल एक्सप्रेस-वे की लम्बाई 195 किमी ही मंज़ूर की गई थी। लेकिन अब इसको राजस्थान के कोटा जिले तक बनाया जाएगा और जिससे चंबल एक्सप्रेस-वे की लम्बाई बढ़कर 283 किमी हो जाएगी।

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Chambal Express Way : चंबल एक्‍सप्रेस वे प्रोजेक्ट क्या है?

चंबल एक्सप्रेस वे मध्य प्रदेश राज्य में एक प्रस्तावित आठ-लेन एक्सप्रेस वे है। प्रस्तावित राजमार्ग राजस्थान के कोटा के ऐतिहासिक शहरों को उत्तर प्रदेश में चंबल नदी के किनारे इटावा से जोड़ेगा जो आगे मध्यप्रदेश में श्योपुर मुरैना, शामपुर, अटेर और गोहद को कवर करेगा। 283 किलोमीटर का चंबल एक्सप्रेस वे राजमार्ग मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश को जोड़ेंगा।

चंबल एक्‍सप्रेस वे का निर्माण मध्यप्रदेश सरकार और केंद्र सरकार मिल कर कर रही है। चंबल एक्‍सप्रेस वे रोड प्रोजेक्ट से मध्यप्रदेश का मुरैना और राजस्थान का कोटा आपस में जुड़ जाएँगे। जिससे इनके बीच आवागमन तेज़ होगा। चंबल एक्‍सप्रेस वे को चंबल के बीहड़ों में चंबल नदी के किनारे-किनारे समानांतर बनाया जाएगा। इसी वजह से इस रोड प्रोजेक्ट का नाम चंबल एक्‍सप्रेस वे रखा गया है।

चंबल एक्‍सप्रेस वे कौन से राज्यों से गुज़रेगा? : जुड़ेंगे दो राज्य

चंबल एक्‍सप्रेस वे से कौन से राज्य जुड़ेंगे: चंबल एक्‍सप्रेस वे से मध्यप्रदेश और राजस्थान आपस में जुड़ेंगे। मध्यप्रदेश में चंबल एक्‍सप्रेस वे का 195 किमी हिस्सा और राजस्थान में चंबल एक्‍सप्रेस वे का 85 किमी हिस्सा बनाया जाएगा। इसके साथ यह उत्तरप्रदेश के इटावा को भी जोड़ेगा।

चंबल एक्सप्रेस वे को पहले केवल श्योपुर से भिण्ड तक ही बनाया जाना था:

प्रोजेक्ट के शुरुआती प्लान के मुताबिक़ इस रोड प्रोजेक्ट को श्योपुर से भिंड तक ही बनाना था। इसके बाद मुरैना जिले के गडोरा गाँव के हाइवे तक का प्लान तैयार किया गया।

अब जो नया फ़ाइनल हो चुका प्लान बना है उसके अनुसार चंबल एक्सप्रेस वे श्योपुर से मुरैना के बीच 195 किमी एक्सप्रेस वे के अलावा श्योपुर से कोटा के बीच इसकी लम्बाई को 87 किमी और बढा दिया गया है।

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Chambal Expressway : चंबल एक्‍सप्रेस वे की लागत कितनी होगी?

मुरैना के कलेक्टर “विनोद शर्मा” इन चंबल एक्‍सप्रेस वे के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया था। उनके अनुसार चंबल एक्‍सप्रेस वे के निर्माण में कुल ख़र्च 4000 करोड़ रुपए का होगा।

चंबल एक्‍सप्रेस वे का प्रोजेक्ट कौन सी सरकार ने बनाया था?

चंबल एक्‍सप्रेस वे प्रोजेक्ट को का प्रस्ताव सबसे पहले मुरैना के कलेक्टर “विनोद शर्मा” ने बनाया था। उन्होंने इस प्रस्ताव को मध्यप्रदेश सरकार को दिया। आगे मध्यप्रदेश सरकार इस पर विस्तार से स्टडी करके प्रोजेक्ट को फ़ाइनल की। अब मध्यप्रदेश सरकार के साथ केंद्र सरकार भी इस चंबल एक्‍सप्रेस वे के निर्माण में सहयोग दे रही है।

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सबसे पहले चंबल एक्सप्रेस वे बनाने के बारे में बताया था। इसके बाद काँग्रेस की कमलनाथ सरकार ने इसको बनाने के लिए सबसे पहले प्रस्ताव पारित किए थे। कुछ समय बाद कमलनाथ सरकार सत्ता से बाहर हो गई और फिर से शिवराज की भाजपा सरकार बन गई। अब शिवराज सरकार ही अपने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहे है।

chambal expressway : चंबल एक्‍सप्रेस वे बनाने में मध्यप्रदेश सरकार का योगदान –

चंबल एक्सप्रेस-वे दो राज्यों के बीच बन रहा रोड प्रोजेक्ट है इसलिए इसमें मुख्यरूप से मध्यप्रदेश की सरकार के योगदान के साथ ही केंद्र सरकार और NHAI का भी महत्वपूर्ण योगदान है।

सबसे पहले तो मध्यप्रदेश सरकार चंबल एक्सप्रेस-वे के लिए अपने राज्य में ज़मीन अधिग्रहण के लिए 305 करोड़ रुपए देगी। इसके साथ ही मध्यप्रदेश सरकार, चंबल एक्सप्रेस-वे के निर्माण में लगने वाले मुरम-गिट्‌टी पर कोई रॉयल्टी नही लेगी।

आपको बता दें की चंबल एक्सप्रेस-वे को जिस इलाक़े में बनाया जाएगा वहाँ 50% ज़मीन सरकारी है। इसलिए मध्यप्रदेश सरकार को केवल 50% ज़मीन का ही अधिग्रहण करना पड़ेगा। इसकी लागत 305 करोड़ रुपए आएगी।

चंबल एक्सप्रेस-वे के लिए ज़रूरी ज़मीन अधिग्रहण के लिए मध्यप्रदेश सरकार कई मॉडल अपना सकती है जैसे लैंड पुलिंग स्कीम या फिर जमीन के बदले जमीन।

चंबल एक्‍सप्रेस वे बनाने में मध्यप्रदेश सरकार कितना पैसा देगी? मध्यप्रदेश इस प्रोजेक्ट के लिए सिर्फ़ जमीन अधिग्रहण का 305 करोड़ रुपए देगी।

chambal expressway – चंबल एक्‍सप्रेस वे के लिए केंद्र सरकार का योगदान :

केन्द्रीय सड़क व परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने क़रीब दो साल पहले ही श्योपुर-मुरैना-भिंड को जोडऩे वाले चंबल एक्‍सप्रेस वे की मंज़ूरी दे दी थी। अब मध्यप्रदेश सरकार इस प्रोजेक्ट को चंबल एक्सप्रेस वे के नाम से बनाने का प्रस्ताव दिया है।

चंबल एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए केंद्र सरकार की ओर से कहा गया था की इस प्रोजेक्ट के लिए लगने वाली निजी ज़मीन का अधिग्रहण मध्यप्रदेश सरकार करे। आपको बता दें की चंबल एक्‍सप्रेस वे प्रोजेक्ट के लिए ज़रूरी ज़मीन में से 50% शासकीय है और 50% जमीन निजी है।

अब मध्यप्रदेश सरकार 305 करोड़ रुपए का फ़ंड बनाकर ज़मीन अधिग्रहण के लिए तैयार हो गई है। ज़मीन अधिग्रहण के बाद चंबल एक्सप्रेस वे का निर्माण केंद्रीय एजेन्सी NHAI करेगी, जिसका पूरा फ़ंड केंद्र सरकार देगी।

चंबल एक्‍सप्रेस वे कौन से इलाक़ों से गुज़रेगा?

चंबल एक्‍सप्रेस वे मध्यप्रदेश के श्योपुर, पोरसा, सबलगढ़, मुरैना, अटेर, भिंड होते हुए राजस्थान के कोटा ज़िला तक जाएगा।

Chambal Expressway Route : चम्बल एक्सप्रेसवे रूट मैप

चंबल एक्‍सप्रेस वे का निर्माण चंबल नदी के समानांतर 1.5 किमी दूरी पर कोटा तक बनाया जाएगा। यह श्योपुर, मुरैना, भिंड को आपस में जोड़ेगा। चंबल एक्‍सप्रेस वे के बनने के बाद इस मार्ग के रास्ते में पड़ने वाले कस्बे जैसे श्यामपुर, गोरस, अटेर, पोरसा इत्यादि मुख्यधारा में जुड़ जाएँगे।

चंबल नदी के समानांतर 1.5 किमी दूरी रखने का कारण चंबल अभ्यारण्य है जो की श्योपुर से भिण्ड तक चंबल नदी के तट से 1 किमी की दूरी पर है।

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चम्बल एक्सप्रेसवे रूट मैप : Chambal Expressway Route map

Route information Chambal Expressway :

Chambal Expressway Route map, Route information Chambal Expressway

इसकी लम्बाई 185 किलोमीटर यानी 115 मील रहेगी सिर्फ़ मध्यप्रदेश में. चम्बल एक्सप्रेसवे की कुल लम्बाई मध्यप्रदेश से राजस्थान के कोटा तक 320 किलोमीटर होगी।

Chambal Expressway Route map

चम्बल एक्सप्रेसवे के मुख्य जंक्शन :

  • पश्चिमी किनारे (पश्चिमी छोर) पर – श्योपुर, गोरस, अटेर, पोरसा, मुरैना, शामपुर होंगे।
  • पूर्वी किनारे (पूर्वी छोर) पर – इटावा
  • हाइवे का प्रकार – भारतीय रोड नेटवर्क के अनुसार, राष्ट्रीय हाइवे, एक्सप्रेस वे, स्टेट हाइवे, State Highways in Madhya Pradesh

चंबल एक्‍सप्रेस वे के लिए कितनी जमीन अधिग्रहित की जाएगी?

चम्बल एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए ज़मीन का सर्वे किया गया था। सर्वे में ये बात सामने आई की कुल 500 हैक्टेयर जमीन की ज़रूरत पड सकती है।

इसमें ख़ास बात ये भी है की जिस इलाक़े से चम्बल एक्सप्रेस वे गुज़रेगा वहाँ की ज़्यादातर ज़मीन सरकारी है। यह पूरी तरह से चम्बल के बीहडों पर बनाया जाएगा। बीच बीच में कुछ ज़मीन किसानों और निजी मालिकों की हैं, सरकार को सिर्फ़ इन्ही निजी ज़मीनों का अधिग्रहण करने के ज़रूरत पड़ेगी।

यानी कुल-मिलाकर सरकार को सिर्फ़ 50% ज़मीन यानी लगभग 250 हैक्टेयर का ही अधिग्रहण करना पड़ेगा।

chambal expressway – चंबल एक्‍सप्रेस वे से इलाक़े को क्या फ़ायदा होगा:

  • कनेक्टिविटी – चंबल का ये पूरा इलाक़ा बहुत पिछड़ा हुआ है। ऐसे में चंबल एक्‍सप्रेस वे के बनने के बाद सैकड़ों गांव सीधे तौर पर मुरैना, श्योपुर, ग्वालियर से जुड़ जाएँगे। जिससे इनके बीच कनेक्टिविटी यानी परिवहन आसान हो जाएगा। इसके साथ ही इसके बनने के बाद मध्यप्रदेश की उत्तरप्रदेश और राजस्थान से बेहतर कनेक्टिविटी मिल जाएगी।
  • उद्योग – चंबल एक्‍सप्रेस वे के बनने से चंबल के बीहड़ों में अनुपयोगी साबित हो रही शासकीय जमीन में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा सकते हैं। एक्‍सप्रेस वे के बनने से परिवहन आसान हो जाएगा इससे इस पिछड़े इलाक़े में औद्योगिक गतिविधियाँ तेज़ होंगी और आम जनता को फ़ायदा होगा। लोगों को रोज़गार भी मिलेगा साथ में इनकम बढ़ेगी।
  • पर्यटन – चंबल एक्‍सप्रेस वे रास्ते में पड़ने वाले पड़ावली-मितावली जैसे पर्यटन आकर्षण केन्द्र में शामिल हो जाएँगे। इसके अलावा चंबल सेंचुरी, अटेर किला में भी पर्यटन बढ़ेगा। साथ में इसके रास्ते में पड़ने वाले कई अन्य एतिहासिक स्थलों में भी पर्यटन बढ़ेगा। इसका फ़ायदा वहाँ की आम जनता का होगा। अभी तक कनेक्टिविटी ना होने के कारण इलाके में पर्यटन शून्य के बराबर है। साथ ही यह इलाक़ा काफ़ी समय तक चंबल के डाकुओं के कारण भी कुख्यात रहा है, जिससे पर्यटन नही बाद पाया। अब बेहतर कनेक्टिविटी और डाकुओं के सफ़ाये के कारण पर्यटन बढ़ने के सम्भावना है।
  • उद्योग और पर्यटन बढ़ने से चम्बल का पिछड़ा इलाक़ा मुख्यधारा में शामिल हो जाएगा।
  • बचत – चंबल एक्‍सप्रेस वे के बनने से श्योपुर और भिंड के बीच की दूरी में 40 किमी की कमी हो जाएगी। इसका फ़ायदा सीधे तौर पर इलाक़े के लोगों को मिलेगा। चार पहिया डीजल वाहनों की बात करें तो उनको 180 रुपए के लगभग के डीजल की बचत होगी। और पेट्रोल वाहनों में 270 रुपए के लगभग पेट्रोल की बचत हो पाएगी। साथ में ये भी फ़ायदा की जो लोग ग्वालियर से कोटा होते हुए राजस्थान जाते हैं उनको बेहतर सड़क मार्ग मिल जाएगा।

चंबल एक्‍सप्रेस वे का निर्माण कौन करेगा?

चंबल एक्‍सप्रेस वे का निर्माण केंद्रीय एजेन्सी NHAI (नेशनल हाइवे अथाॅरिटी आफ इंडिया) करेगी। इसके लिए कंसलटेंसी का काम भोपाल की कम्पनी ‘एलएन मालवीय’ को सौंपा गया है। एलएन मालवीय कम्पनी ने शुरूआती डीपीआर तैयार कर दिया है, अब इसे रिवाइज करके सुधारने और ज़रूरत अनुसार बदलने का काम किया जा रहा है।

chambal expressway – चंबल एक्‍सप्रेस वे से कितने गावों को फ़ायदा होगा :

चंबल एक्‍सप्रेस वे के बनने से मध्यप्रदेश के 55 गांवों को सीधा फ़ायदा मिलने वाला है।

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इनमें शामिल हैं मुरैना के सबलगढ़ क्षेत्र के अटार घाट, हीरापुर से लेकर कैलारस, जौरा व मुरैना तहसील के गांव। चंबल एक्‍सप्रेस वे के किनारे झुंडपुरा, अटार, मथुरापुरा, छिनबरा, खांडोली, गड़ौरा गाँव पड़ने वाले हैं।

मध्यप्रदेश सरकार एक्सप्रेस वे के किनारे पर्यटन स्थल विकसित करने की तैयारी में:

मध्यप्रदेश सरकार के प्लान के मुताबिक़ यह एक्सप्रेस वे मुरैना के रहू घाट, श्योपुर में पालपुर कूनो और चंबल सेंचुरी से होकर जाएगा। ऐसे में इस इलाक़े को सरकार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है। साथ में ईको टूरिज्म को बढ़ाने के लिए भी काम किया जाएगा।

chambal expressway – चंबल एक्‍सप्रेस वे की ख़ास बातें :

चंबल एक्‍सप्रेस वे की खास बात यह है कि नेशनल हाइवे 44 के जरिए नार्थ – साउथ और ईस्ट – वेस्ट काॅरीडोर आपस में जुड़ जाएँगे। यह एक्‍सप्रेस वे चंबल नदी के किनारे किनारे नदी से 1.5 किमी की दूरी से गुजरेगा। प्रारंभिक डीपीआर जो तैयार किया गया है उसके मुताबिक चंबल अभयारण्य का हिस्सा इसमें पड़ने वाला था इसलिए इसकी नदी से दूरी को 1.5 किमी कर दिया गया ताकि चंबल अभयारण्य से दूरी बनाई जा सके।

सरकार की योजना चंबल एक्‍सप्रेस वे के किनारे इंडस्ट्रीयल टाउन, लाजिस्टिक हब विकसित करने की है:

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने कुछ समय पहले कहा था कि चंबल एक्‍सप्रेस वे के लिए राज्य सरकार फ़ंड का प्रबंध करे। इसी सिलसिले में इस राजमार्ग के किनारे व्यापारिक गतिविधियों की सम्भावना तलाशी जा रही है। व्यापारिक गतिविधियाँ शुरू होने से एक्सप्रेस-वे के निर्माण लागत भी जल्द निकल आएगी।

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा की गई हाईलेवल बैठक में एक्सप्रेस-वे के किनारे (नदी की ओर नहीं) लाजिस्टिक हब, इंडस्ट्रीयल टाउन के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विचार विमर्श किया गया। साथ ही कंसलटेंट को बता दिया गया है कि वो चंबल एक्‍सप्रेस वे के किनारे पर 16-16 एकड़ की ज़मीन की पहचान करे। जिनका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों जैसे की पेट्रोल पंप, वेयर हाउस, रेस्टाेरेंट-मोटल्स, लाजिस्टिक हब, इंडस्ट्रीयल टाउन के लिए किया जाएगा।

चंबल एक्‍सप्रेस वे पालपुर-कूनो के पास से गुजरेंगा जिसके कारण इस इलाक़े में होटल और ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया जाएगा, ताकि लोगों को रोज़गार के नए अवसर मिले और सरकार को भी फ़ायदा हो।

चंबल एक्‍सप्रेस वे कब तक बन कर तैयार हो जाएगा?

अभी इसका फ़ाइनल डीपीआर तैयार नही हुआ है। ना ही इसका निर्माण कार्य चालू हुआ है। इसलिए चंबल एक्‍सप्रेस वे कब तक बन कर तैयार हो जाएगा इसके बारे में कुछ नही कहा जा सकता। फिर भी अनुमान के मुताबिक़ जब भी काम चालू होगा उसके बाद ज़मीन अधिग्रहण होने पर एक से डेढ़ साल का वक़्त लग जाएगा इसको पूरा होने में।

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