भारतीय वायु सेना का लड़ाकू जहाज़ MIG-25 फॉक्सबैट जिसे हमेशा गुप्त रखा गया, लड़ाकू जहाज़ MIG-25 फॉक्सबैट के बारे में पूरी जानकारी

MiG 25 Foxbats fighter jet

क्या आपको भारतीय वायु सेना के लड़ाकू जहाज़ MIG-25 फॉक्सबैट के बारे में जानकारी है. शायद नही होगी क्योंकि लड़ाकू जहाज़ MIG-25 फॉक्सबैट को भारतीय वायु सेना ने हमेशा गुप्त रखा था. यह उस समय का अजेय योध्दा था, जिसके बारे में पाकिस्तान सोच कर भी डरता था.

भारतीय वायु सेना के लड़ाकू जहाज़ MIG-25 फॉक्सबैट मैक 3.2 की गति से उड़ने में सक्षम था। मैक 3.2 का मतलब होता है लगभग 50 किमी/मिनट। भारत में 8 सिंगल सीट और 2 डबल सीट एयरक्राफ्ट थे। मिग 25 फॉक्सबैट्स लड़ाकू जहाज़ “ट्रिसोनिक स्क्वाड्रन” के अंदर काम करते थे, जो की बरेली में थी.

बरेली में अत्यधिक सिक्योरिटीज में एयरक्राफ्ट को रखा गया था। बरेली में त्रिशूल एयरबेस है। त्रिशूल एयरबेस में भारत का सबसे बड़ा भूमिगत हैंगर है। उन हैंगरों में MIG 25 को गुप्त रूप से रखा गया था.

लड़ाकू जहाज़ MIG-25 फॉक्सबैट को इतना गुप्त रखा गया था कि भारतीय वायुसेना के सभी कर्मियों को यह भी पता नहीं था कि उनके हैंगर में MIG-25 है।

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लड़ाकू जहाज़ MIG-25 फॉक्सबैट का अधिग्रहण भी पूरी तरह से गुप्त था –

लड़ाकू जहाज़ MIG-25 फॉक्सबैट को भगवान विष्णु के विमान वाहक “पौराणिक पक्षी” गरुड़ के नाम पर इसका नामकरण किया गया था।

लड़ाकू जहाज़ MIG-25 फॉक्सबैट ने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई –

मई 1997 में, जब भारतीय एयरफोर्स का लड़ाकू जहाज़ MIG-25 फॉक्सबैट ने पाकिस्तानी क्षेत्र में मैक 3.2 से अधिक गति से उड़ान भरी तो पाकिस्तान काफ़ी डर गया था.

विमान इतना तेज था कि पाकिस्तान कुछ समझ पता यह अपना काम करके वहाँ से वापस आ गया था. लड़ाकू जहाज़ MIG-25 फॉक्सबैट भारतीय वायु सेना की शान था. पाकिस्तान की कोई भी मिसाइल मिग-25 को मार गिराने में सक्षम नहीं थी। लड़ाकू जहाज़ MIG-25 फॉक्सबैट को पाकिस्तान की सीमा के बीच कभी-कभी देखा जाता था।
विमान ने पाकिस्तान के क्षेत्र में ध्वनि अवरोध को तोड़ दिया जिसके परिणामस्वरूप एक बूम आया था। यह भारत द्वारा पाकिस्तान को यह याद दिलाने के लिए था कि उनके पास इस लड़ाकू जहाज़ MIG-25 फॉक्सबैट से निपटने के लिए कोई विमान नहीं है, इसलिए अपनी हद में रहें।

MiG 25 Foxbats fighter jet

MIG-25 FOXBAT को 2006 में भारतीय वायु सेना से हटा दिया गया

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय वायु सेना ने 2006 में MIG-25 FOXBAT को अपनी सेवा से हटा दिया था. इसके बारे में कभी भी आधिकारिक रूप से कुछ नही कहा गया. 2006 में  भारतीय वायु सेना की सेवा से सभी MIG-25 FOXBAT लड़ाकू जहाज़ों को हटा दिया गया.

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मिग-25 फॉक्सबैट, सोवियत संघ के मिकोयान-गुरेविच (Mikoyan-Gurevich) कम्पनी द्वारा डिजाइन किया गया एक अत्यंत गोपनीय लड़ाकू विमान था। इस विमान का विकास 1950 के दशक में शुरू हुआ और इसके पहले प्रोटोटाइप ने 1964 में उड़ान भरी।

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मिग-25 फॉक्सबैट की जानकारी दुनिया को तब हुई थी जब द्वितीय विश्वयुद्ध में मिग-25 फॉक्सबैट ने पश्चिमी देशों को पराजित कर दिया था और उसके बाद जापान के हैकोडेट हवाई अड्डे पर उतरा. तब तक इस विमान के बारे में दुनिया को कोई जानकारी नहीं थी. उस समय इस विमान को सोवियत पायलट लेफ्टिनेंट विक्टर बेलेंको उड़ा रहे थे.

भारत ने 1981 में आठ सिंगल सीट विमान और दो ट्विन सीट टोही संस्करण, मिग-25 R का अधिग्रहण किया।

इस विमान को गुप्त रूप से रखने के लिए, इन विमानों को एंटोनोव विमानों (दुनिया के सबसे बड़े विमान) से बरेली के त्रिशूल एयर बेस पर लाया गया था। त्रिशूल एयर बेस में देश के सबसे बड़े भूमिगत हैंगर में से एक है और इसलिए यहाँ मिग-25 को गुप्त रूप से रखा गया था.

विंग कमांडर आलोक चौहान ने कहा कि आईएएफ में कई लोगों ने कभी भी बरेली बेस को नहीं देखा था जहां विमान तैनात था या यहां तक ​​कि विमान सेवा में भी था, लेकिन IAF के अधिकतर कर्मियों को इसके बारे में कोई जानकारी नही थी। इसने लगभग 20-25 उड़ान भरी थी, जो मुख्य रूप से सीमा पार के टोही मिशन के लिए होती थी.

“मिग-25 आर” के एक मिशन की कहानी भी बहुत फैली थी। 1997 में, संवेदनशील रक्षा स्थलों की तस्वीर लेने के लिए एक गुप्त मिशन पर इसे भेजा गया था, इसने इस्लामाबाद पर ध्वनि अवरोध को तोड़ दिया, जिससे पूरे शहर को बहुत तेज़ झटका लगा। इससे पहले कि पाकिस्तान वायु सेना इसे रोकने के लिए अपने स्वयं के जेट्स को उड़ा पाती, तब तक मिग-25 सुरक्षित रूप से भारतीय क्षेत्र में वापस आ गया था।

“मिग-25 आर” के स्पेयर पार्ट्स की कमी और यूएवी (मानव रहित हवाई वाहन) के अधिग्रहण और उच्च तकनीक उपग्रहों के कारण अंततः 2006 में इसे सेवानिवृत्ति कर दिया गया।

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दिल्ली के पालम एयर फोर्स बेस में स्थित भारतीय वायु सेना संग्रहालय में एक मिग-25 प्रदर्शन के लिए रखा गया है।

मिग-25 भारतीय वायु सेना में शामिल किए जाने वाले सबसे महान विमानों में से एक रहा है और इसे उड़ाने वालों की वीरता को हमेशा याद रखा जाएगा।

MiG 25 Foxbats fighter jet

भारत में कितने मिग 25 फॉक्सबैट्स हैं या थे?

मिग-25 फॉक्सबैट को अंधेरे और रहस्य में डूबी एक किंवदंती के रूप में वर्णित किया जा सकता है। भारतीय वायुसेना में सेवारत “मिग-25” 2006 में सक्रिय सेवा से सेवानिवृत्त हुआ। इस शानदार विमान को 1981 के आसपास अधिग्रहित किया गया था और बरेली में तैनात किया गया था। भारतीय वायुसेना में लगभग आठ एकल सीट और दो जुड़वां सीट वाले मिग-25 सेवा में थे.

भारत मिग 25 फॉक्सबैट्स लड़ाकू जहाज़ को सेवानिवृत्त क्यों किया गया?

भारतीय वायु सेना का “मिग 25 फॉक्सबैट्स लड़ाकू जहाज़” मुख्य रूप से सीमा पर के टोहि मिशन के काम में उपयोग किया जाता था. इसलिए IAF पायलटों के जीवन को खतरा होता था, क्योंकि कोई लड़ाकू जहाज़ जब किसी देश की सीमा में (उस देश की इजाज़त के बिना) टोहि मिशन के लिए प्रवेश करता है, तो उसे हमेशा ख़ुद को दुश्मन की नज़र से बचा के रखना पड़ता है. इसमें ज़रा सी चूक सीधे मौत के मुँह में ले जाएगी.

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इसलिए IAF पायलटों के जीवन के खतरों को देखते हुए इसे 2006 में सेवानिवृत्त कर दिया गया. लेकिन जब इसे सेवानिवृत्त किया गया था उस समय तक ISRO ने उन्नत उपग्रह विकसित करना शुरू कर दिया था, ISRO के इन उन्नत उपग्रहों के कारण अब IAF को मिग 25 की ज़रूरत नही थी.
इसके साथ ही UAV (मानव रहित विमान) का अधिग्रहण और स्पेयर पार्ट्स की कमी भी इस विमान के सेवानिवृत्त होने का एक कारण था.

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आज के समय में भारत में मिग 25 फॉक्सबैट्स लड़ाकू जहाज़ कहा रखा गया है?

भारत में मिग 25 फॉक्सबैट्स लड़ाकू जहाज़ को कुछ अनछुए स्थानों (भारतीय वायु सेना के गुप्त स्थानों) पर रखा गया है, लेकिन इसकी जानकारी आधिकारिक रूप से किसी भी रिकॉर्ड में मौजूद नही है. हालाँकि इनमें से एक मिग 25 फॉक्सबैट्स लड़ाकू जहाज़ पालम के वायु सेना संग्रहालय में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखा गया है.

मिग 25 फॉक्सबैट्स लड़ाकू जहाज़ को भारत ने कब ख़रीदा था?

1981 के आस पास भारत ने सोवियत संघ के साथ हुए सौदे में 10 मिग 25 फॉक्सबैट्स लड़ाकू जहाजों को खरीदा था। हालांकि, IAF सेवा में आने के बाद इनमें से 2 विमान जल्द ही दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे। चूंकि यह एक गोपनीय सौदा था, इसलिए IAF दुर्घटना को मीडिया को नही बता सकता था. 2006 तक आते आते भारत में सिर्फ़ 3 विमान बचे थे. जिन्हें 2006 में सेवानिवृत् कर दिया गया.

MiG-21 और MiG-23 की तुलना में मिग-25 को पहले ही सेवानिवृत्त और डिकमीशन क्यों किया गया था?

वैसे, इसके रिटायरमेंट का कारण पूरी तरह से यह सेवा पर आधारित नहीं है बल्कि परिचालन सेवा के प्रकार पर आधारित है। फॉक्सबैट एक लड़ाकू विमान नहीं था, यह एक इंटरसेप्टर था। इसका मतलब है बंदूक, प्रक्षेपास्त्र या पर्याप्त रक्षात्मक हथियार इसमें नहीं थे। इंटरसेप्टर का कार्य केवल अज्ञात विमान का पीछा करने या अनधिकृत रूप से दूसरे देशों में टोहि मिशन को अंजाम देना होता है. शीत युद्ध के दौरान इंटरसेप्टर बहुत थे। भारत में इसकी सेवा यह 90 के दशक के दौरान कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से तनाव के दौरान ली गई थी।

सन 2000 के बाद ISRO द्वारा उन्नत उपग्रहों के निर्माण और UAV के अधिग्रहण के कारण IAF को इस टोहि विमान की अब कोई ज़रूरत नही थी जो कि IAF के पायलटों के जीवन को ख़तरे में डालता था. इसके साथ ही UAV (मानव रहित विमान) का अधिग्रहण और स्पेयर पार्ट्स की कमी भी इस विमान के सेवानिवृत्त होने का एक कारण था.

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मिग -25 की सबसे तेज़ गति कितनी थी? (top speed of MiG-25)

इस सवाल के दो जवाब हैं :
एक Mach 2.85 इस स्पीड में विमान बिना किसी क्षति के उड़ सकता था। यह उन दिनों के लिए बहुत तेज था और अभी भी किसी भी मौजूदा ऑपरेशनल एयरक्राफ्ट की तुलना में तेज और कुछ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की तुलना में भी तेज है। यह इंटरसेप्ट मिशन के लिए पर्याप्त से अधिक था जिसके लिए मिग-25 डिजाइन किया गया था।

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हालाँकि, मिग-25, मैक 3.2 की स्पीड से भी उड़ सकता था लेकिन यह केवल आपात स्थिति के लिए थी। क्योंकि Mach 2.85 की तुलना में मैक 3.2 की स्पीड से उड़ान भरने से इंजन गर्म हो जाता था और उसमें आग लगने की सम्भावना बन जाती थी इसलिए मैक 3.2 की स्पीड केवल आपात  स्थिति के लिए थी.

A-12 और इसके वंशज, SR-71 सेवा में प्रवेश करने वाला अब तक का एकमात्र ऑपरेशनल सैन्य विमान था जो अपनी आपातकालीन ओवर-स्पीड क्षमता का उपयोग करके मिग-25 को भी पछाड़ सकता था। कोई अन्य ऑपरेशनल मिलिट्री एयरक्राफ्ट आज भी मैक 2.85 की स्पीड से मैच नहीं कर सका। मिग-25 सोवियत संघ द्वारा निर्मित सबसे तेज़ परिचालन विमान है।

क्या मिग-25 कभी युद्ध में भाग लिया था?

मिग-25 मुख्य रूप से दो प्रमुख वैरिएंट में आया था – हाई स्पीड इंटरसेप्टर-फाइटर और टोही विमान। इसको ज़्यादातर टोही विमान के रूप में उपयोग में लिया गया था. यह युद्ध में भी मुख्य रूप से टोहि विमान का काम करता था.

भारतीय वायु सेना ने दो दशकों तक सफलतापूर्वक मिग-25 RBs के एक स्क्वाड्रन का संचालन किया, अंत में 2006 में उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया। इनमें से एक ने 1997 में एक हंगामा पैदा किया जब उसने पाकिस्तान पर ध्वनि अवरोधक को तोड़ दिया। पाकिस्तान ने इसकी व्याख्या जानबूझकर किए गए प्रयास के रूप में की थी।

1971-72 के दौरान मिस्र की वायु सेना ने साथ मिग-25 के टोही संस्करण का उपयोग किया था। इनको सोवियत कर्मचारियों द्वारा संचालित किया गया था।

इराकी वायु सेना के द्वारा 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध में मिग-25 का उपयोग किया गया था. मिग-25 ने प्रथम खाड़ी युद्ध के दौरान खुद को काफी अलग पहचान दी। मिग-25 ने युद्ध के पहले ही दिन अमेरिकी नेवी के एफ-18 को मार गिराया।

एक अन्य प्रसिद्ध घटना में, एक एकल मिग-25 ने आठ F-15s द्वारा चलाए गए बमबारी को सफलतापूर्वक रोक दिया और साथ-साथ ECM विमानों को दूर भगाया और फिर F-15s को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया.

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