डरावनी कहानी: हवेली का रहस्य “हिंदी कहानी भूत की”

राहुल, एक युवा इतिहासकार, पुरानी हवेलियों और उनके पीछे छिपे रहस्यों की खोज में रुचि रखता था। एक दिन उसे गाँव के सरपंच, शंकरलाल से एक पुरानी हवेली के बारे में पता चला। शंकरलाल ने बताया कि वह हवेली दशकों से खाली पड़ी है और वहां रात के समय अजीबोगरीब घटनाएँ होती हैं। राहुल ने अपनी दोस्त आरती और छोटे भाई अर्जुन के साथ उस हवेली की सच्चाई जानने का निश्चय किया।

राहुल, आरती और अर्जुन ने गाँव पहुँचकर सरपंच शंकरलाल से मुलाकात की। शंकरलाल ने उन्हें हवेली के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, “यह हवेली ठाकुर रणवीर सिंह की थी। कहते हैं, ठाकुर साहब की बेटी, पार्वती, इस हवेली में अपने प्रेमी राजेश से मिलने आई थी। लेकिन, ठाकुर साहब ने राजेश को मार डाला और पार्वती ने उस रात हवेली में ही आत्महत्या कर ली। तब से यह हवेली भूतहा मानी जाती है।”

राहुल, आरती और अर्जुन ने हवेली का अन्वेषण करने का फैसला किया। वे दिन के समय हवेली के पास पहुंचे। हवेली की दीवारें जर्जर हो चुकी थीं और चारों ओर झाड़-झंखाड़ फैला हुआ था। हवेली के अंदर घुसते ही एक अजीब सी ठंडक ने उन्हें घेर लिया। हवेली के बड़े-बड़े कमरों में चलना किसी भूलभुलैया में चलने जैसा था।

शाम होते-होते राहुल, आरती और अर्जुन ने हवेली के एक कमरे में अपना डेरा जमा लिया। उन्होंने कैमरे और टॉर्च निकालकर पूरे घर का निरीक्षण करना शुरू किया। अचानक, एक दरवाजा खुद-ब-खुद बंद हो गया। राहुल ने जल्दी से दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा अटका हुआ था। तभी, आरती ने देखा कि एक साया उनके पास से गुजरा।

आरती ने डरते हुए कहा, “यहाँ कुछ अजीब हो रहा है।” तभी, एक धुंधली परछाई उनके सामने प्रकट हुई। वह परछाई पार्वती की थी। पार्वती ने करुणा से कहा, “मुझे न्याय चाहिए। मेरे प्रेमी की हत्या की गई थी और मैं यहाँ फंसी हुई हूँ।” राहुल ने हिम्मत जुटाकर पूछा, “हम आपकी कैसे मदद कर सकते हैं?” पार्वती ने जवाब दिया, “ठाकुर साहब की तिजोरी में मेरे प्रेमी का अंतिम पत्र है। उसे पढ़ने से ही मेरी आत्मा को शांति मिल सकती है।”

राहुल, आरती और अर्जुन ने पार्वती की बात मानी और तिजोरी की खोज शुरू की। तिजोरी हवेली के सबसे पुराने कमरे में मिली। जैसे ही उन्होंने तिजोरी खोली, वहाँ एक पुराना, जर्जर पत्र मिला। पत्र में लिखा था, “प्रिय पार्वती, मुझे माफ कर देना। मैं तुम्हें हमेशा प्यार करता रहूँगा। – राजेश।” पत्र पढ़ते ही पार्वती की आत्मा ने एक सुखद मुस्कान के साथ कहा, “अब मैं स्वतंत्र हूँ। धन्यवाद।”

उस रात के बाद हवेली में कभी कोई अजीब घटना नहीं घटी। राहुल, आरती और अर्जुन ने हवेली को छोड़ दिया, लेकिन उनके दिलों में एक अनोखी कहानी रह गई। उन्होंने जान लिया था कि प्यार और न्याय की ताकत भूतों को भी शांति दे सकती है।

यह कहानी गाँव में एक मिथक बन गई, और लोग अब उस हवेली को एक पवित्र स्थान मानते हैं। हवेली की कहानी पीढ़ियों तक सुनाई जाती रही, यह याद दिलाते हुए कि सच्चाई और न्याय की हमेशा जीत होती है।

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