hindi kahaniyan : बड़े भाई का लालच – छोटे भाई का सबक

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रामेश्वर नामी एक छोटा सा गांव था। जिसमें महेंद्र नाम का एक किसान रहता था। उस किसान के दो बेटे थे। एक बेटे का नाम रघु और दूसरे बेटे का नाम रवि था। रघु बहुत होशियार था लेकिन रवि उतना ही भोला-भाला था।

महेंद्र कुछ दिनों से बहुत बीमार था। उसने सोचा कि सारी जायदाद उन दोनों बेटों के नाम कर दूँ। फिर उसने अपने बड़े बेटे को बुलाया और बुलाकर कहने लगा – देखो बेटा रघु मुझे लगता है कि मैं बहुत ज्यादा दिन तक जिंदा नहीं रहूंगा। मैंने अपनी पूरी जिंदगी की जो कमाई, कमाई है – यह घर, 1 एकड़ जमीन, आम का पेड़ और एक गाय है।

तुम बहुत होशियार हो, लेकिन तुम्हारा छोटा भाई बहुत ही भोला है। उसको कहीं जाने मत देना। अपने पास ही रखना और उसका ध्यान रखना। यह सारी दौलत आपस में दोनो मिलकर बाँट लेना।

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यह कहकर  महेंद्र, रवि को बड़े भाई रघु को सौंप देता है। कुछ दिन गुज़रने के बाद महेन्द्र बीमारी की वजह से मर जाता है। रघु उतना अच्छा इंसान भी नहीं था जितना महेंद्र समझता था। रघु ने सोचा कि उसका छोटा भाई रवि बहुत ही भोला है। वह कुछ भी कर लेगा और उसे कुछ पता नहीं चलेगा।

देखो रवि पापा ने हमें जो जायदाद दी है ये घर और हमारा खेत ही है। मैं घर ले लूंगा और तुम्हारे लिए खेत के पास ही में एक घर बनाऊंगा। वैसे भी तुम इस पुराने घर में नहीं रह पाओगे।

खेत भी हम दोनों आधा-आधा बाँट लेंगे। पानी की तरफ़ का हिस्सा मैं ले लूंगा और इधर वाला तुम ले लेना। हमारी जो गाय हैं उसका अगला भाग तुम ले लेना और पीछे वाला भाग मैं ले लूंगा। हमारे आम का पेड़ उसका नीचे वाला भाग तुम ले लो ऊपर वाला भाग मैं ले लूंगा। पेड़ की ठंडी ठंडी छांव का अच्छे से मजा लेना।

यह क्या भैया सारी मेहनत से आप ही करेंगे क्या आप कितने अच्छे हो भैया। इस तरह रघु अपने छोटे भाई रवि को जायदाद में हिस्सा दे देता है। गाँव में जो घर था वो उसने ले लिया और गांव के बाहर जो उनका खेत था। वहाँ रघु ने एक घर बनवा कर रवि को दिया।

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जिस तरफ़ पानी बहता था वह हिस्सा खुद ले लेता है और जहां पानी नहीं पहुंच पाता था वो छोटे भाई को दे देता है। लेकिन रवि अपने भोलेपन की वजह से यह सारी बातें समझ नहीं पाया। हर दिन बेचारा रवि गाय को घास खिलाता और उसकी देखभाल करता था। बड़ा भाई गोबर वगैरह साफ करके अपनी खेत ले जाकर अपने खेत में डाल लेता था ताकि उसकी फसल अच्छी हो।

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बड़े भाई को गोबर उठाता देख रवि को बहुत दुख होता था। रवि ने रघु से 1 दिन कहा भैया आप कितनी मेहनत करते हो। मैं तो सिर्फ इसको खाना खिलाता हूं। लेकिन आप उसकी सारी सफाई करते हैं। आपका इतना काम करना मुझसे देखा नही जाता। एक काम करते हैं गाय का अगला हिस्सा आप ले और पिछला हिस्सा मैं ले लूंगा।

नहीं-नहीं मेरे भाई इसकी कोई जरूरत नहीं, तुम्हें ये सब मेहनत करने की कोई जरूरत नहीं है, मै सब देख लूँगा। रवि हर दिन आम के पेड़ को पानी डालता था और उस पेड़ के साए के नीचे आराम करता था। अरे भैया कितनी देर उसी धूप में काम करते रहेंगे। थोड़ी देर के लिए यहां इस पेड़ के नीचे आकर विश्राम कीजिए। नहीं वो पेड़ के साया तो सिर्फ तुम्हारी है।

मैंने कहा था ना उस साये का मज़ा सिर्फ़ तुम्हीं उठाओ। रवि को लग रहा था कि उसका बड़ा भाई उसे काम करता हुआ देख नहीं सकता इसीलिए यह सब वह खुद कर रहा है।

इसी तरह कुछ दिन गुजरने के बाद रघु ने शादी कर ली। रघु की पत्नी भी उसी की तरह बहुत ही ज्यादा लालची थी। फिर रवि ने भी एक दिन एक अच्छी लड़की से शादी कर ली। रवि की पत्नी बहुत समझदार और होशियार थी। रवि के बड़े भाई की सारी करतूतें देख रही थी। इसी तरह कुछ दिन गुजर गए।

फिर एक दिन उस गाय ने बच्चा दिया। ये देख कर रवि बहुत ही खुश हो गया और कहने लगा भैया यह गाय का बच्चा कितना प्यारा है। आज से हर दिन मैं ही इसकी देखभाल करूंगा। तुम क्यों इसका ध्यान रखोगे, ये तो गाय के पीछे के हिस्से से आया है ना। इस बच्चे का ध्यान मै रखूंगा और वह अपने मां का दूध ही पिएगा। तुम्हारी यहां कोई जरूरत नहीं है।

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रघु की बातों से रवि को बहुत दुख हुआ। रघु हर दिन गाय का दूध भी ले लिया करता था। रवि की पत्नी रघु का किया सारा धोखा पहचान लेती है और बहुत ही ज्यादा दुखी हो जाती है। यह बात उसे पता चल जाती है कि उसका पति कितना भोला है।
सुनिए जी आप बहुत ही भोले हैं और इसी भोलेपन का फायदा आपके बड़े भाई उठा रहे हैं। गाय को तो चारा आप खिलाते हैं और उसका दूध आपके बड़े भाई ले लेते हैं।

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अब मैं कर भी क्या सकता हूं। भैया ने तो मुझे गाय का आगे वाला भाग ही दिया था और गाय के बच्चे को तो मुझे छूने भी नहीं दिया। भैया के इस बर्ताव से मुझे बहुत दुख हो रहा है।

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अब आप ऐसा ही कीजिए जैसा मैं कहूंगी। रोज की तरह रघु गाय का दूध निकालने के लिए बैठता है कि सामने खड़ा रवि एक लकड़ी से उस गाय के पैर पर जोर की मार मारता है। फिर उस गाय ने दूध निकाल रहे रघु को बहुत जोर से लात मरती है जिससे नीचे बैठा रघु वहीं गिर जाता है। क्या हुआ रवि ? क्या कर रहे हो? उस गाय को क्यों मार रहे हो?  कुछ नहीं भैया वो तो मै मच्छरों को भगा रहा था।

ये सुनकर रघु फिर से दूध निकालने के लिए बैठता है। रवि फिर से उसी लकड़ी से गाय को मारता है। अचानक गाय रघु को लात मार देती है। हर बार इसी तरह रघू दूध निकालने के लिए बैठता है और रवि गाय को लकड़ी से मारता । और गाय रघु को मारती है और रघु नीचे गिर जाता।

कुछ देर बाद रघु को अकल आ गई और अपने छोटे भाई से कहने लगा ठीक है मेरे भाई बस करते हैं और कल से मैं भी गाय को चारा खिलाऊँगा और  फिर दूध भी हम दोनों आपस में मिलकर बांट लेंगे।

अपने बड़े भाई को बदलता हुआ देख, रवि बहुत खुश हो गया इसी तरह कुछ दिन और गुजर गए। आम के पेड़ को फल लगने लगे फिर रघु उन फलों को तोड़ना शुरू करता है। भैया मुझे भी थोड़ा आम दो ना।

ऐसा कैसे हो सकता है। पेड़ की साया मैंने कभी नहीं ली। तो फिर ये आम मै तुम्हें कैसे दूंगा। अगर तुम्हें आम खाने ही हैं, तो जो अब नीचे गिरेंगे वो खा लेना। आप मुझे इतना मौका देते ही कहां हो भैया। पहले ही सारे आम तोड़ लेते हो।

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बड़े भाई रघु का बर्ताव रवि और उसकी पत्नी को बहुत ही बुरा लगता था। आप बिल्कुल दुखी मत होना। जैसा मैं कहूंगी बिल्कुल वैसा ही कीजिए। दूसरे दिन सुबह रोज की तरह रघु पेड़ पर चढ़कर आम तोड़ने लगा। रवि ने सारे पेड़ पर कुछ लगाकर वहां से चला गया। फिर जब रघु पेड़ से नीचे उतरने लगा तो वह फिसल कर नीचे गिर गया।क्योंकि जो चीज रवि ने पेड़ पर लगाई थी वह बहुत ही चिपचिपी थी। जिसकी वजह से रवि नीचे गिर गया था।

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यह क्या रवि तुमने पेड़ पर क्या लगाया था। वो तो एक तंत्र की हुई चीज है उसको हर दिन पेड़ पर लगाने से बहुत ज्यादा आम उगेंगे, ऐसा मुझसे एक स्वामी जी ने कहा था। भैया दूसरे दिन रघु ने एक सीढी की मदद से पेड़ पर चढ़कर आम तोड़ने लगा। यह देखकर रवि और उसकी पत्नी ने मिलकर एक नई तरकीब निकाली। रोज़ की तरह रघु आम तोड़ने शुरू किए। रवि दो नौकरों को लेकर वहां पहुंचता है और उन दोनों आदमियों से कहता है कि वह उस पेड़ को काट दें।

यह क्या है रवि? यह सारा सामान और ये कुल्हाड़ी किस लिए? यहां इसका क्या काम है? कुछ नहीं भैया स्वामी जी ने मुझे कुछ बीज दिए हैं। इस पेड़ की जगह उन बीजों को गाड़ना इसीलिए इस पेड़ को काटना जरूरी है।

ऐसा अगर हम करेंगे तो इस पेड़ की जड़ों में भी आम निकलेंगे ऐसा मुझसे स्वामी जी ने कहा है। नहीं-नहीं रुको अगर तुम्हें भी आम चाहिए तो तुम भी ले लो। इस तरह दोनों भाई मिलकर सारे आम आपस में बांट लिया करते थे। रवि के भोलेपन की वजह से उसका बड़ा भाई उसका बहुत ही गलत फायदा उठा लिया था। लेकिन रवि पत्नी की होशियारी और समझदारी से उसे और ज्यादा धोखा ना दे सका।

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अपने छोटे भाई को धोखा देकर अपने आप में ही रघु बहुत शर्मिंदा हुआ था। फिर उसने अपनी गलती का एहसास कर लिया और अपने छोटे भाई से माफी मांग ली।

Moral of the Story- धोखा देने वाले लोग मीठी-मीठी बातें जरूर बनाते हैं लेकिन हमें चाहिए कि हम उनकी बातों पर अंधा विश्वास ना करें और होशियारी से उनको सबक सिखाएं।

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