Hindi Grammar

सर्वनाम की परिभाषा, प्रकार, उदाहरण (Sarvanam Ki Paribhasha)

सर्वनाम (Sarvanam): हिंदी व्याकरण में ‘सर्वनाम’ एक महत्वपूर्ण पद है जो संज्ञा के स्थान पर प्रयोग होता है। यह भाषा को संक्षिप्त और स्पष्ट बनाने में सहायक होता है। इस लेख में हम सर्वनाम की परिभाषा (Sarvanam Ki Paribhasha), सर्वनाम के प्रकार (Sarvanam ke Prakar) और उसकी महत्वपूर्णता पर विस्तृत चर्चा करेंगे। सर्वनाम की परिभाषा […]

समास की परिभाषा, प्रकार, नियम, उदाहरण (Samas Ki Paribhasha)

समास की परिभाषा (Samas Ki Paribhasha): हिंदी भाषा और साहित्य में ‘समास’ का महत्वपूर्ण स्थान है। समास का उपयोग भाषा को संक्षिप्त और प्रभावी बनाने में होता है। यह शब्दों के योग से बने नए शब्दों के निर्माण की प्रक्रिया है। इस लेख में हम समास की परिभाषा (Definition of Samas in Hindi), समास के

विलोम शब्द की परिभाषा, प्रकार, उदाहरण (Vilom Shabd Ki Paribhasha)

विलोम शब्द की परिभाषा: हिंदी भाषा और साहित्य में ‘विलोम शब्द’ का महत्वपूर्ण स्थान है। विलोम शब्दों का सही और सटीक प्रयोग भाषा को समृद्ध और प्रबल बनाता है। ये शब्द भाषा को अधिक रोचक और अर्थपूर्ण बनाने में सहायक होते हैं। इस लेख में हम विलोम शब्द की परिभाषा (Vilom Shabd Ki Paribhasha), विलोम

अलंकार की परिभाषा, प्रकार, उदाहरण, महत्व | Alankar Ki Paribhasha

अलंकार की परिभाषा: हिंदी साहित्य में ‘अलंकार’ का महत्वपूर्ण स्थान है। अलंकार का प्रयोग काव्य और साहित्यिक रचनाओं को सजाने और सवारने के लिए किया जाता है। ‘अलंकार’ शब्द संस्कृत से आया है, जिसका अर्थ है आभूषण या सजावट। यह साहित्यिक भाषा को सुन्दर, प्रभावशाली और आकर्षक बनाता है। इस लेख में हम ‘अलंकार’ की

रस की परिभाषा (Ras Ki Paribhasha)

रस की परिभाषा: साहित्य का महत्वपूर्ण घटक होने के नाते ‘रस’ हिंदी साहित्य और संस्कृत साहित्य का अभिन्न अंग है। यह साहित्यिक कृतियों में पाठकों या दर्शकों के मन में उत्पन्न होने वाली भावनाओं का सूचक होता है। ‘रस’ शब्द संस्कृत भाषा से आया है, जिसका अर्थ है स्वाद, आनंद, या सत्व। इस लेख में

संज्ञा की परिभाषा (Noun Ki Paribhasha)

संज्ञा क्या है? संज्ञा (Noun) एक महत्वपूर्ण व्याकरणिक तत्व है जो किसी भी भाषा की नींव होती है। हिंदी भाषा में, संज्ञा का उपयोग किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु, गुण, भाव, या किसी क्रिया की स्थिति को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। सरल शब्दों में, संज्ञा वे शब्द होते हैं जिनके माध्यम से हम

अधर्म में उपसर्ग और मूल शब्द | Adharm me Upsarg aur Mool Shabd

‘अधर्म’ शब्द को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है: ‘अ’ और ‘धर्म’। आइए इन दोनों भागों को विस्तार से समझते हैं: अब, ‘अधर्म’ शब्द का निर्माण ‘अ’ उपसर्ग और ‘धर्म’ मूल शब्द को मिलाकर होता है। इसका अर्थ है ‘निश्चित रूप से नहीं धर्म’ या ‘धर्म के विपरीत’। यह उन कार्यों, विचारों, या

अचेतन में उपसर्ग और मूल शब्द? | Achetan me Upsarg aur Mool Shabd

‘अचेतन’ शब्द को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है: ‘अ’ और ‘चेतन’। आइए इन दोनों भागों को विस्तार से समझते हैं: अब, ‘अचेतन’ शब्द का निर्माण ‘अ’ उपसर्ग और ‘चेतन’ मूल शब्द को मिलाकर होता है। इसका अर्थ है ‘निश्चित रूप से नहीं चेतन’ या ‘बिना चेतना के’। यह उन स्थितियों या वस्तुओं

विष का विलोम शब्द | Vish Ka Vilom Shabd

विष का विलोम शब्द अमृत होता है। विष और अमृत एक दूसरे के विपरीत अर्थ प्रकट करते हैं। विष शब्द का अर्थ है जहर, जो प्राणघातक होता है, जबकि अमृत का अर्थ है वह पदार्थ जो अमरता प्रदान करता है या जीवनदायक होता है। इस प्रकार, “विष” और “अमृत” दो विपरीत शब्द हैं जो जीवन

घटना का विलोम शब्द | Ghatna Ka Vilom Shabd

घटना का विलोम शब्द बढ़ना होता है। घटना का अर्थ है “कम होना, घटित होना, या किसी चीज की मात्रा में कमी आना।” जबकि इसके विलोम शब्द बढ़ना का अर्थ है “ज्यादा होना, वृद्धि होना, या किसी चीज की मात्रा में वृद्धि होना।” ‘बढ़ना’ शब्द ‘घटना’ के विपरीत या उल्टा अर्थ प्रकट करता है, इसलिए

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