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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बनेगा पहला हिंदू मंदिर First Hindu Temple in Islamabad

Pakistan Hindu Temple : पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हिंदूओं के लिए का पहला मंदिर बनने जा रहा है। इसका नाम “श्री कृष्ण मंदिर” हो सकता है। इस्‍लामाबाद की हिंदू पंचायत ने मंदिर का नाम “श्री कृष्ण मंदिर” रखने की माँग की है।

Hindu Temple in Pakistan

आपको बता दें की इस्लामाबाद के पहले हिंदू मंदिर की अनुमानित लागत 10 करोड़ पाकिस्तानी रुपए आँकी गई है। इस मंदिर को इस्लामाबाद के सेक्टर एच-9/2 में बनाया जाएगा।

श्री कृष्ण मंदिर इस्लामाबाद, पाकिस्तान की जानकारी

First Hindu Temple in Islamabad Detail :

  • मंदिर का नाम – श्री कृष्ण मंदिर
  • धर्म सम्बद्धता – हिंदू
  • देवता – हिंदू देवता श्री कृष्ण
  • शासी निकाय (Governing body) – अभी फैसला नही हुआ
  • स्थानीय विवरण (Locality Details) – सेक्टर NH-9/2
  • क्षेत्र/राज्य (Territory/State) – इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र (Islamabad Capital Territory)
  • देश (Country)-  पाकिस्तान (Pakistan)
  • वेबसाइट : अभी नही बनी (Not Avialable)
  • भूमि पूजन समारोह – मंगलवार, 23 जून 2020
  • निर्माण कब शुरू हुआ – मंगलवार, 23 जून 2020
  • कब तक निर्माण हो जाएगा – अभी तक फैसला नही
  • लागत – 10 करोड़ पाकिस्तानी रुपए
  • क्षेत्रफल – 20,000 वर्ग फीट
  • अनुदान और फंडिंग – पाकिस्तान सरकार और दान

मंगलवार, 23 जून 2020 को इस मंदिर के लिए आधारशिला रखने के साथ मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इस्लामाबाद का “श्री कृष्ण मंदिर” क़रीब 20 हजार वर्ग फुट में बनाया जाएगा। इसके लिए जमीन तीन साल पहले ही मिल गई थी, लेकिन कुछ क़ानूनी बाधाओं की वजह से इस्लामाबाद के इस “श्री कृष्ण मंदिर” का काम शुरू नही हो पाया था।

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First Hind Temple in Islamabad :

इस्लामाबाद के हिंदू पंचायत ने बनने वाले इस मंदिर (इस्लामाबाद का पहला हिंदू मंदिर) का नाम श्री कृष्ण मंदिर रखने के लिए कहा है। लेकिन अभी तक मंदिर के नाम का फैसला नही हो पाया।

श्री कृष्ण मंदिर इस्लामाबाद के लिए जमीन कैसे मिली –

पाकिस्तानी समाचार एजेन्सी डॉन के अनुसार, पाकिस्तान के इस्लामाबाद में पिछले दो दशकों से हिंदूओं की आबादी बढ़ रही है। ऐसे में इनके धार्मिक कामों के लिए मंदिर की आवश्यकता महसूस हो रही थी।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 2017 में पाकिस्तान सरकार और राजधानी विकास प्राधिकरण (सीडीए) को इस्लामाबाद में हिंदुओं के लिए मंदिर बनाने के लिए जगह देने का आदेश दिया था, इसी वजह से मानवाधिकार आयोग के दवाब में 2017 में ही इस्लामाबाद के राजधानी विकास प्राधिकरण (सीडीए) ने  हिंदू पंचायत को मंदिर निर्माण के लिए जगह दे दिया था।

लेकिन उसके बाद भी पाकिस्तान के कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों और राजधानी विकास प्राधिकरण (सीडीए) ने जरूरी मंजजूरियाँ ना देकर मंदिर निर्माण तीन साल तक रोके रखा, अब मानवाधिकार आयोग के दवाब के बाद सभी मंज़ूरी दे दी गई हैं, जिससे इस्लामाबाद के पहले हिंदू मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो सका।

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इस्लामाबाद के सीडीए और अन्य संबंधित एजेंसियों से मंदिर के दस्तावेज और साइट के नक्शे मंजूरी ना मिल पाने के कारण तीन साल की देरी हुई।

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इस्लामाबाद के पहले हिंद मंदिर की विशेषताएँ : (Hindu Temple in Pakistan)

  • इस मंदिर के निर्माण में 10 करोड़ पाकिस्तानी रुपए लगेंगे।
  • पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में यह पहला हिंदू मंदिर है।
  • इसका नाम “श्री कृष्णा मंदिर” हो सकता है।
  • इस्लामाबाद के इस श्री कृष्णा मंदिर का परिसर 20 हज़ार वर्ग फुट में बनेगा।
  • इस्लामाबाद के पहले हिंद मंदिर के परिसर में हिंदुओं के अंतिम संस्‍कार के लिए एक स्‍थल का भी निर्माण किया जाएगा।
  • इसमें हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार कई और निर्माण कार्य होंगे।
  • “श्री कृष्णा मंदिर” के परिसर में हिंदुओं के लिए एक श्मशान घाट का भी निर्माण होगा।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हिंदुओं का पहला मंदिर:

मानवाधिकार के संसदीय सचिव लाल चंद मल्ही द्वारा एक समारोह में मंदिर के लिए भूमि पूजन किया गया। मल्ही ने अपने सम्बोधन में कहा की इस्लामाबाद और इसके आस पास के क्षेत्रों में 1947 से पहले कई मंदिर थे, जिनमे सैदपुर गांव, रावल झील, कोरंग नदी के पास बने मंदिर प्रमुख थे। लेकिन मुस्लिम कट्टरपंथियों की वजह से इनका रख-रखाव और पूजा पाठ ना होने से उपयोग में नही आ पाए।

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पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्री “पीर नूरुल हक कादरी” ने बताया कि इस्लामाबाद में बनने वाले इस मंदिर के निर्माण के लिए सरकार 10 करोड़ रुपये का खर्च करेगी। इसके वाला इस मंदिर के निर्माण के लिए विशेष सहायता देने के लिए भी पाकिस्तान के पीएम इमरान खान से बात की गई है।

आपको बता दें की पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के हिंदू काफ़ी समय पहले से अपने लिए मंदिर की माँग कर रहे थे, लेकिन आज तक पाकिस्तान की सरकार के कानों में ज़ू तक नही रेंगी थी। अब मानवाधिकार संगठन के दवाब में पाकिस्तान की सरकार को हिंदुओं के लिए मंदिर बनाने की मंज़ूरी देनी पड़ी।

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