होली 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त और होली कैलेंडर | Holi 2025 Date, Shubh Muhurt, Calendar

होली, जिसे रंगों का त्योहार कहा जाता है, भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख और मनोहारी पर्व है। यह पर्व केवल रंगों से नहीं बल्कि आपसी भाईचारे, प्रेम और हर्षोल्लास से भरा होता है। होली का यह पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली 2025 के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए पढ़ें।

होली 2025 की तिथि | Holi Date 2025

होली का त्योहार 2025 में 13 मार्च को मनाया जाएगा। फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन होली का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। होली का पर्व दो दिन तक चलता है। पहले दिन होलिका दहन और दूसरे दिन रंगवाली होली या धुलेंडी मनाई जाती है।

होली तिथि 2025 | Holi 2025 Date

होली तिथि के अनुसार, 2025 में होली का त्योहार निम्नलिखित तिथियों पर मनाया जाएगा:

  • होलिका दहन: 12 मार्च 2025
  • रंगवाली होली: 13 मार्च 2025

होली का शुभ मुहूर्त | Holi Ka Shubh Muhurt

होली के पर्व में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। इस दिन पूजा और होलिका दहन का मुहूर्त विशेष रूप से देखा जाता है। 2025 में होली के शुभ मुहूर्त निम्नलिखित होंगे:

  • होलिका दहन शुभ मुहूर्त: 12 मार्च 2025 को रात 8:53 बजे से रात 11:30 बजे तक।
  • रंगवाली होली शुभ समय: 13 मार्च 2025 को प्रातः 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।

होली कैलेंडर 2025 | Holi Calendar 2025

होली का पर्व हर वर्ष विभिन्न तिथियों पर आता है, इसलिए होली कैलेंडर का महत्व अधिक होता है। 2025 में होली का कैलेंडर निम्नलिखित है:

तिथिपर्व
12 मार्च 2025होलिका दहन
13 मार्च 2025रंगवाली होली (धुलेंडी)

होली का महत्त्व

होली का त्योहार भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है। यह पर्व न केवल रंगों का बल्कि भक्ति, प्रेम, और सद्भावना का भी प्रतीक है। होली का पर्व हर वर्ग, जाति, और धर्म के लोग एक साथ मिलकर मनाते हैं, जो आपसी भाईचारे और प्रेम का सन्देश देता है।

पौराणिक कथा

होली का पर्व मुख्यतः हिरण्यकश्यप, प्रह्लाद, और होलिका की कथा से जुड़ा है। हिरण्यकश्यप एक अत्याचारी राजा था जिसने भगवान विष्णु की उपासना का विरोध किया। उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्त था। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए होलिका की सहायता ली, जो वरदान से अग्नि में नहीं जलती थी। परंतु, भगवान की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई। तभी से होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में मनाया जाता है।

राधा-कृष्ण की होली

वृंदावन और बरसाना की होली राधा और कृष्ण की प्रेम लीला के रूप में प्रसिद्ध है। कृष्ण अपने सखाओं के साथ राधा और गोपियों के साथ होली खेलते थे। यह प्रेम और उल्लास का पर्व है जिसे बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

होली की तैयारी

होली की तैयारी कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, नए कपड़े खरीदते हैं और विभिन्न प्रकार के पकवान बनाते हैं। होली की तैयारी में निम्नलिखित बातें शामिल होती हैं:

घर की सफाई

होली से पहले लोग अपने घरों की सफाई करते हैं। घर की सफाई से न केवल घर की शोभा बढ़ती है बल्कि इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

पकवान बनाना

होली के मौके पर विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं। गुजिया, मालपुआ, दही-भल्ले, पापड़ी-चाट आदि जैसे पकवान होली की खासियत हैं। साथ ही ठंडाई और भांग का सेवन भी किया जाता है।

रंगों की खरीदारी

होली के लिए विभिन्न प्रकार के रंगों की खरीदारी की जाती है। बाजारों में रंग-बिरंगे गुलाल और पिचकारियों की धूम होती है।

होलिका दहन

होलिका दहन होली के पर्व का प्रमुख हिस्सा है। इस दिन चौराहों पर होलिका सजाई जाती है और रात को अग्नि प्रज्वलित कर होलिका दहन किया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होलिका दहन के बाद लोग एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और घर में खुशहाली की कामना करते हैं।

होलिका दहन की विधि

होलिका दहन के लिए लकड़ी, उपले, और अन्य सामग्री एकत्रित की जाती है। होलिका दहन से पहले पूजा की जाती है जिसमें रोली, अक्षत, माला, हल्दी, और जल का प्रयोग होता है। अग्नि प्रज्वलित करने के बाद लोग परिक्रमा करते हैं और गाने-बजाने के साथ होली का उत्सव शुरू होता है।

रंगवाली होली

रंगवाली होली होलिका दहन के अगले दिन मनाई जाती है। इस दिन लोग रंग और गुलाल से खेलते हैं।

होली खेलने के तरीके

होली खेलने के अनेक तरीके हैं। लोग एक दूसरे पर रंग, गुलाल, और पानी डालते हैं। पिचकारी और गुब्बारों का भी उपयोग होता है। इस दिन बच्चे, बुजुर्ग, और युवा सभी होली के रंगों में डूबे होते हैं।

सावधानियां

होली खेलते समय कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए। हर्बल और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें ताकि त्वचा को नुकसान न हो। आँखों और नाक-कान में रंग जाने से बचें। होली खेलते समय पर्यावरण का भी ध्यान रखें और पानी का अधिक उपयोग न करें।

होली के अन्य पहलू

होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि इसके और भी कई पहलू हैं:

होली गीत

होली के अवसर पर विशेष होली गीत गाए जाते हैं। राधा-कृष्ण की लीला से जुड़े गीत, फगुआ और लोकगीत होली की शान होते हैं। इन गीतों से होली के रंग और भी गहरे हो जाते हैं।

होली का सांस्कृतिक महत्त्व

होली भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। इस पर्व के माध्यम से भारतीय समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भावना का संदेश दिया जाता है। होली के दिन लोग सभी गिले-शिकवे भूलकर एक-दूसरे के गले मिलते हैं और रिश्तों में मिठास लाते हैं।

होली का वैश्विक स्वरूप

होली अब केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विश्व के अन्य देशों में भी धूमधाम से मनाई जाती है। विभिन्न देशों में भारतीय समुदाय होली के रंगों में सराबोर होते हैं और इसे सांस्कृतिक धरोहर के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

होली के लोकाचार

होली का पर्व विभिन्न भारतीय राज्यों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। विभिन्न राज्यों की होली के लोकाचार और परंपराएं कुछ इस प्रकार हैं:

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में होली का पर्व खासतौर पर मथुरा, वृंदावन, और बरसाना में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यहाँ की लठमार होली विश्व प्रसिद्ध है। लोग यहाँ के होली महोत्सव में दूर-दूर से आते हैं।

राजस्थान

राजस्थान में होली का पर्व रंग-बिरंगे परिधानों और धूमधाम से मनाया जाता है। यहाँ के ग्रामीण क्षेत्रों में होली का विशेष महत्त्व है और लोग लोकगीतों और नृत्य के साथ होली मनाते हैं।

गुजरात

गुजरात में होली के पर्व को ‘ढोलचड़िया’ के नाम से जाना जाता है। यहाँ के लोग होली के दिन आग में नारियल और अन्य सामग्री डालकर होलिका दहन करते हैं और ढोल बजाकर खुशियां मनाते हैं।

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में होली का पर्व रंगपंचमी के रूप में मनाया जाता है। यहाँ होली का पर्व पारंपरिक धूमधाम और मस्ती के साथ मनाया जाता है।

बंगाल

बंगाल में होली का पर्व ‘डोलजात्रा’ के रूप में मनाया जाता है। यहाँ के लोग राधा-कृष्ण की मूर्तियों की पूजा करते हैं और रंगों के साथ होली खेलते हैं।

होली के सकारात्मक पहलू

होली का पर्व केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि इसके कई सकारात्मक पहलू भी हैं।

समाज में एकता

होली का पर्व समाज में एकता और भाईचारा बढ़ाने का काम करता है। इस दिन लोग जाति, धर्म, और वर्ग के भेदभाव को भूलकर एक साथ मिलकर होली खेलते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य

होली का पर्व मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। रंगों और मस्ती से भरे इस पर्व के दौरान लोग अपने तनाव और चिंताओं को भूलकर खुशी के क्षण बिताते हैं।

पर्यावरण

पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी होली का पर्व महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक रंगों के प्रयोग से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचता और साथ ही होलिका दहन के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का भी नाश होता है।

निष्कर्ष

होली 2025 का पर्व विशेष रूप से यादगार बनाने के लिए लोग अभी से तैयारी में जुट जाते हैं। इस वर्ष 12 मार्च को होलिका दहन और 13 मार्च को रंगवाली होली मनाई जाएगी। होली का यह पर्व न केवल रंगों का बल्कि आपसी प्रेम, सद्भावना, और भाईचारे का संदेश देता है। होली के दिन समाज में खुशहाली और समृद्धि का संचार होता है।

होली के इस पर्व को मनाने के लिए आवश्यक है कि हम पर्यावरण का भी ध्यान रखें और प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करें। साथ ही अपने दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर इस पर्व को खुशियों से भरपूर बनाएं।

होली 2025 के इस पर्व को विशेष और यादगार बनाएं और आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा दें। होली की हार्दिक शुभकामनाएं!

यह लेख Holi 2025 के बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को समाहित करता है। होली की तिथि, शुभ मुहूर्त, होली कैलेंडर, और होली के विविध पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। आशा है कि यह लेख होली पर्व को और भी रोचक और जानकारियों से भरा बनाएगा।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top