कृष्णा और प्राचीन मंदिर (Ghost Story in Hindi | भूत की कहानी हिंदी में)

कृष्णा को पुरानी जगहों पर घूमना बहुत पसंद था। उसे हर पुरानी ईमारत, किला, और मंदिर में छिपी कहानियों और रहस्यों को जानने की चाहत थी। उसकी इसी रुचि के चलते, एक दिन उसने अपने दोस्तों के साथ एक प्राचीन मंदिर जाने का निर्णय लिया। इस मंदिर के बारे में बहुत सी रहस्यमयी बातें सुनने को मिलती थीं। लोग कहते थे कि इस मंदिर में एक भूत का वास है।

कृष्णा के दोस्तों में से कुछ लोग इस यात्रा के लिए तैयार हो गए, जबकि कुछ डर के कारण पीछे हट गए। उन सबने एक दिन तय किया और सुबह-सुबह मंदिर की ओर चल पड़े। जब वे मंदिर के करीब पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि मंदिर बेहद पुराना था और उसके चारों ओर घने पेड़ थे। मंदिर का रास्ता भी पत्थरों और झाड़ियों से भरा हुआ था।

मंदिर के बाहर एक बूढ़ा आदमी बैठा हुआ था, जो उनके आने पर बोला, “यहां मत जाओ, बच्चे। इस मंदिर में बुरी आत्माओं का वास है।” लेकिन कृष्णा ने अपनी जिज्ञासा के कारण उसकी बातों को नजरअंदाज कर दिया और अपने दोस्तों के साथ मंदिर के अंदर प्रवेश किया।

मंदिर के अंदर घुसते ही उन्हें एक अजीब सी महक आई, जो बहुत ही पुरानी और रहस्यमयी लग रही थी। मंदिर की दीवारों पर प्राचीन चित्र और मूर्तियाँ बनी हुई थीं। अचानक, बिना किसी कारण के मंदिर की घंटियां बजने लगीं। वे सब चौक गए और डर के मारे एक-दूसरे को देखने लगे। इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, चारों ओर धुंआ फैल गया।

धुंए के बीच से एक प्रेत निकल कर आया। वह प्रेत कृष्णा की ओर बढ़ा और उसने कृष्णा को अपनी गिरफ्त में ले लिया। कृष्णा ने महसूस किया कि उसका शरीर जम सा गया है और वह हिल नहीं पा रहा था। उसके दोस्त भी डर के मारे चिल्लाने लगे, लेकिन उनके पास कोई उपाय नहीं था।

प्रेत ने कृष्णा से कहा, “तुम्हें इस मंदिर में आने की सजा मिलेगी। यहां से कोई वापस नहीं जाता।”

कृष्णा ने हिम्मत जुटाकर पूछा, “तुम कौन हो और तुम हमसे क्या चाहते हो?”

प्रेत ने उत्तर दिया, “मैं इस मंदिर का रक्षक हूं। सैकड़ों साल पहले, मैं एक साधारण आदमी था। लेकिन एक दिन, कुछ लोगों ने इस मंदिर को लूटने की कोशिश की और मुझे मार दिया। मेरी आत्मा को इस मंदिर की रक्षा करने का श्राप मिला।”

कृष्णा ने शांतिपूर्वक कहा, “हम लूटेरे नहीं हैं। हम तो सिर्फ इस मंदिर के बारे में जानने आए हैं। अगर तुम हमें जाने दोगे, तो हम तुम्हारे बारे में सबको बताएंगे और लोग इस मंदिर का सम्मान करेंगे।”

प्रेत कुछ देर तक चुप रहा और फिर उसने कहा, “अगर तुम सच कह रहे हो, तो मैं तुम्हें एक मौका दूंगा। इस मंदिर में एक गुप्त द्वार है, जो नीचे एक तहखाने में जाता है। वहां एक पुरानी किताब है, जिसमें मेरी आत्मा को मुक्त करने का उपाय लिखा है। अगर तुम वह किताब ला सकते हो, तो मैं तुम्हें छोड़ दूंगा।”

कृष्णा और उसके दोस्तों ने एक-दूसरे को देखा और फिर सहमति में सिर हिलाया। उन्होंने प्रेत से पूछा, “तहखाने का द्वार कहाँ है?”

प्रेत ने मंदिर के एक कोने की ओर इशारा किया। वहां एक पत्थर का दरवाजा था, जिसे ध्यान से देखने पर ही पहचान पाना संभव था। कृष्णा और उसके दोस्तों ने मिलकर उस दरवाजे को खोला और नीचे तहखाने में उतरने लगे। तहखाने में अंधेरा और ठंडक थी, और दीवारों पर जाले लगे हुए थे।

कृष्णा ने अपने फोन की टॉर्च जलाकर रास्ता देखा। तहखाने के अंत में, उन्हें एक पुरानी लकड़ी की अलमारी मिली। अलमारी के अंदर एक मोटी और धूल से ढकी किताब रखी हुई थी। उन्होंने सावधानी से उस किताब को निकाला और पढ़ना शुरू किया। किताब में कई प्राचीन मंत्र और अनुष्ठान लिखे हुए थे।

कृष्णा को जल्दी ही वह पृष्ठ मिल गया, जिसमें प्रेत की आत्मा को मुक्त करने का उपाय लिखा था। उन्होंने मंत्र को जोर से पढ़ा और अनुष्ठान को पूरा किया। जैसे ही अनुष्ठान पूरा हुआ, तहखाने में एक तेज रोशनी फैल गई और प्रेत की आवाज गूंज उठी, “तुमने मुझे मुक्त कर दिया। अब तुम सब सुरक्षित हो।”

कृष्णा और उसके दोस्त तहखाने से बाहर निकले और देखा कि प्रेत गायब हो चुका था। मंदिर अब एक शांतिपूर्ण और पवित्र स्थान की तरह लग रहा था। उन्होंने राहत की सांस ली और मंदिर से बाहर निकल आए। बाहर निकलते ही, वे फिर से उस बूढ़े आदमी से मिले।

बूढ़ा आदमी मुस्कुराते हुए बोला, “मैं जानता था कि तुम लोग यह कर पाओगे। अब यह मंदिर सुरक्षित है।”

कृष्णा और उसके दोस्तों ने धन्यवाद कहा और गांव की ओर लौट पड़े। उन्होंने उस मंदिर के बारे में गांव वालों को बताया और कहा कि अब वहां कोई डर नहीं है। गांव वाले बहुत खुश हुए और उन्होंने मंदिर की सफाई और पुनर्निर्माण का निर्णय लिया।

कृष्णा की इस साहसिक यात्रा ने न केवल एक प्राचीन मंदिर को सुरक्षित किया, बल्कि उसे और उसके दोस्तों को भी एक अमूल्य सीख दी कि साहस और समझदारी से हर समस्या का समाधान किया जा सकता है। इस घटना के बाद, कृष्णा की पुरानी जगहों के प्रति रुचि और भी बढ़ गई और वह हमेशा नई-नई जगहों की खोज में लगा रहता। उसकी हर नई यात्रा एक नई कहानी और नई सीख लेकर आती, जिसे वह सबके साथ साझा करता।

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