Lonar Lake Mystery : रहस्यमय दुनिया (Mysterious World) में आपका स्वागत है। यहाँ पर महाराष्ट्र की लोनार झील के रहस्य के बारे में विस्तार से बताया गया है। आख़िर इस झील का पानी अचानक से लाल क्यों हो गया था। आइए जानते हैं लोनार झील का रहस्य (Lonar Lake Mystery) क्या है।

Lonar Lake Mystery
Lonar Lake Mystery

लोनार झील का रहस्य | Lonar Lake Mystery

लोनार झील का रहस्य (Lonar Lake Mystery) जानने से पहले आइए इस झील के बारे में आपको बताते हैं।

लोनार झील

लोनार झील महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के लोनार में मुंबई से 500 किमी दूर स्थित है। इस साल 2020 के जून की शुरुआत में लोनार झील का पानी का रंग अचानक से गुलाबी/लाल हो गया था। लोनार झील का पानी खारा है, इसके पीएच स्तर की बात करें तो ph 10.5 है। लोनार झील को भारत की राष्ट्रीय भौगोलिक विरासत का दर्जा मिला हुआ है।

लोनार झील के कई रहस्य हैं जिन्हें आज तक वैज्ञानिक समझ नही पाए। 5,70,000 साल पुरानी लोनार झील का वर्णन पुराणों और वेदों में भी किया गया है। नासा सहित दुनिया की कई एजेंसियों ने लोनार झील पर शोध किया है। शोध से पता चला है कि लोनार झील का निर्माण उल्कापिंडों के पृथ्वी से टकराने के कारण हुआ था। लेकिन उल्का पिंड कहां गया, इसकी जानकारी अभी नहीं है। इस झील के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें :- Lonar Lake : महाराष्ट्र की लोनार झील की सम्पूर्ण जानकारी

लोनार झील का पानी लाल होने का रहस्य ॰ Lonar Lake Mystery

लोनार झील का पानी लाल होने का कारण : स्थानीय लोग और साथ ही प्रकृतिवादी और वैज्ञानिक 1.2 किमी व्यास की लोनार झील के पानी के परिवर्तन से आश्चर्यचकित हैं। हालाँकि यह पहली घटना नहीं है, जब लोनार झील का रंग बदला हो, इससे पहले भी लोनार झील के पानी का रंग कई बार बदला था। लेकिन इस बार यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

लोनार झील में शैवाल होते हैं। पानी के रंग में परिवर्तन लवणता और शैवाल के कारण हो सकता है। अगर लोनार झील के पानी में ऑक्सीजन लेवल की बात करें तो इस समय पानी की सतह से सिर्फ़ एक मीटर नीचे ऑक्सीजन का लेवल शून्य है। कुछ समय पहले ईरान में भी ऐसी घटना उई थी, जब ईरान की झील में लवणता की अधिकता के कारण पानी का रंग लाल हो गया था। वैज्ञानिकों का कहना है की इस झील के पानी का लाल रंग भी लवणता और जलाशय में शैवाल की उपस्थिति के कारण हुआ है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश नहीं होने के कारण लोनार झील में अभी ताज़े पानी की कमी है और जल स्तर भी कम हुआ है। ऐसे में लवणता बढ़ी होगी और शैवाल की प्रकृति में कुछ बदलाव आया होगा। जिससे लोनार झील के पानी का रंग बदल कर लाल हो गया। किसी भी पानी का रंग फफूंद (कवक) के कारण लाल होता है, जिसे हैलोबैक्टीरिया और डुनोनिला सालिना के रूप में जाना जाता है।

निसर्ग तूफान के कारण हुई बारिश से डूनोनिला सलीना कवक और हैलोबैक्टीरिया पानी के तल में बैठ गए होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि लोनार झील के पानी के लाल होने के और कई कारण हो सकते हैं, जिसके बारे में जांच जारी है। हालाँकि कई लोग इसे एक चमत्कार मानते हैं, ऐसे में कई अफवाहों भी उड़ने लगी हैं।

लोनार झील कैसे बनी

कई साल पहले तक वैज्ञानिकों का मानना था कि झील का निर्माण ज्वालामुखी के से हुआ होगा। लेकिन उनकी यह बात गलत साबित हुई, इसका कारण था की अगर लोनार झील ज्वालामुखी से उत्पन्न होती तो इसकी गहराई 150 मीटर नहीं होती।

नई रिसर्च से जानकारी मिली कि इस लोनार झील का निर्माण किसी उल्कापिंड के गिरने से हुआ था। कहा जाता है कि लगभग 50,000 साल पहले एक उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने के बाद झील का निर्माण हुआ था। 2010 से पहले, इस झील को 52,000 साल पुराना माना जाता था, लेकिन हाल में हुई रिसर्च से जानकारी मिली है कि लोनार झील लगभग 5,70,000 साल पुरानी है।

झील के बारे में एक किंवदंती यह भी है कि लोनासुर नामक एक राक्षस था जिसे स्वयं भगवान विष्णु ने मारा था. राक्षस का खून भगवान विष्णु के पैर के अंगूठा में लग गया था। रक्त साफ़ करने के लिए भगवान ने अपने अंगूठे को ज़मीन से रगड़ा इस वजह से यहाँ एक गहरे गड्ढा बन गया जिसे आज लोनार झील के नाम से जाना जाता है।

लोनार झील के बारे में पौराणिक कहानियां भी हैं। लोनार झील का उल्लेख ऋग्वेद, स्कंद पुराण, पद्म पुराण और आईन-ए-अकबरी में भी है। कहा जाता है कि अकबर इसका पानी अपने सूप में डालने के बाद पीता था। हालांकि, 1823 में ब्रिटिश अधिकारी जेई अलेक्जेंडर के यहाँ आने के बाद ही लोनार झील प्रसिध्द हुई।

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