महाराष्ट्र की लोनार झील का रहस्य, लोनार झील का पानी अचानक हुआ लाल, झील के रहस्य जानें

लोनार झील के बारे में जानकारी

लोनार झील बुलढाणा जिले के लोनार में मुंबई से 500 किमी दूर है, बुलढाणा जिला महाराष्ट्र में है। इस साल जून की शुरुआत में लोनार झील का पानी का रंग गुलाबी/लाल हो गया था।

Mystery of Lonar lake + Lonar lake Mystery

वैज्ञानिकों का कहना है की झील के पानी का लाल रंग लवणता और जलाशय में शैवाल की उपस्थिति के कारण हुआ है। कहा जाता है कि लगभग 50,000 साल पहले एक उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने के बाद झील का निर्माण हुआ था।

लोनार झील का पानी  खारा है, इसके पीएच स्तर की बात करें तो ph 10.5 है। लोनार झील को भारत की राष्ट्रीय भौगोलिक स्विरासत का दर्जा मिला हुआ है।

महाराष्ट्र की लोनार झील का रहस्य

लोनार झील के कई रहस्य हैं जिन्हें आज तक वैज्ञानिक समझ नही पाए। 5,70,000 साल पुरानी लोनार झील का वर्णन पुराणों और वेदों में भी किया गया है।

नासा सहित दुनिया की कई एजेंसियों ने लोनार झील पर शोध किया है। शोध से पता चला है कि लोनार झील का निर्माण उल्कापिंडों के पृथ्वी से टकराने के कारण हुआ था। लेकिन उल्का पिंड कहां गया, इसकी जानकारी अभी नहीं है।

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लोनार झील उल्कापिंड टकराने से बनी है

कई साल पहले तक वैज्ञानिकों का मानना था कि झील का निर्माण ज्वालामुखी के से हुआ होगा। लेकिन उनकी यह बात गलत साबित हुई, इसका कारण था की अगर लोनार झील ज्वालामुखी से उत्पन्न होती तो इसकी गहराई 150 मीटर नहीं होती।

नई रिसर्च से जानकारी मिली कि इस लोनार झील का निर्माण किसी उल्कापिंड के गिरने से हुआ था। 2010 से पहले, इस झील को 52,000 साल पुराना माना जाता था, लेकिन हाल में हुई रिसर्च  से जानकारी मिली है कि लोनार झील लगभग 5,70,000 साल पुरानी है।

लोनार झील का पानी लाल क्यों हो गया जानें लोनार झील का रहस्य

लोनार झील का पानी लाल होने का कारण : स्थानीय लोग और साथ ही प्रकृतिवादी और वैज्ञानिक 1.2 किमी व्यास की लोनार झील के पानी के परिवर्तन से आश्चर्यचकित हैं। हालाँकि यह पहली घटना नहीं है, जब लोनार झील का रंग बदला हो, इससे पहले भी लोनार झील के पानी का रंग कई बार बदला था। लेकिन इस बार यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

लोनार झील में शैवाल होते हैं। पानी के रंग में परिवर्तन लवणता और शैवाल के कारण हो सकता है। अगर लोनार झील के पानी में ऑक्सीजन लेवल की बात करें तो इस समय पानी की सतह से सिर्फ़ एक मीटर नीचे ऑक्सीजन का लेवल शून्य है।

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कुछ समय पहले ईरान में भी ऐसी घटना उई थी, जब ईरान की झील में लवणता की अधिकता के कारण पानी का रंग लाल हो गया था।

वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश नहीं होने के कारण लोनार झील में अभी ताज़े पानी की कमी है और जल स्तर भी कम हुआ है। ऐसे में लवणता बढ़ी होगी और शैवाल की प्रकृति में कुछ बदलाव आया होगा। जिससे लोनार झील के पानी का रंग बदल कर लाल हो गया।

लोनार झील में पानी का रंग फफूंद (कवक) के कारण लाल होता है, जिसे हैलोबैक्टीरिया और डुनोनिला सालिना के रूप में जाना जाता है।

निसर्ग तूफान के कारण हुई बारिश से डूनोनिला सलीना कवक और हैलोबैक्टीरिया पानी के तल में बैठ गए होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि लोनार झील के पानी के लाल होने के और कई कारण हो सकते हैं, जिसके बारे में जांच जारी है।

हालाँकि कई लोग इसे एक चमत्कार मानते हैं, ऐसे में कई अफवाहों भी उड़ने लगी हैं।

झील कैसे बनी इसके पीछे कई राज हैं

झील के बारे में एक किंवदंती यह भी है कि लोनासुर नामक एक राक्षस था जिसे स्वयं भगवान विष्णु ने मारा था।  राक्षस का खून भगवान विष्णु के पैर के अंगूठा में लग गया था। रक्त साफ़ करने के लिए भगवान ने अपने अंगूठे को ज़मीन से रगड़ा इस वजह से यहाँ एक गहरे गड्ढा बन गया जिसे आज लोनार झील के नाम से जाना जाता है।

लोनार झील के बारे में पौराणिक कहानियां भी हैं

लोनार झील का उल्लेख ऋग्वेद, स्कंद पुराण, पद्म पुराण और आईन-ए-अकबरी में भी है। कहा जाता है कि अकबर इसका पानी अपने सूप में डालने के बाद पीता था। हालांकि, 1823 में ब्रिटिश अधिकारी जेई अलेक्जेंडर के यहाँ आने के बाद ही लोनार झील प्रसिध्द हुई।

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