Lonar Lake : देश और दुनिया के लिए रहस्य बन चुकी महाराष्ट्र की लोनार झील की पूरी जानकारी यहाँ दी गई है। अगर आप Lonar Lake Wikipedia in Hindi खोज रहे हैं, तो अब आपको हिंदी भाषा में इस रहस्यमयी झील की सम्पूर्ण जानकारी यहाँ मिल जाएगी।

Lonar Lake | लोनार झील

लोनार झील जिसे लोनार क्रेटर के रूप में भी जाना जाता है, एक अधिसूचित राष्ट्रीय भू-विरासत स्मारक है। इसका पानी खारा है। यह महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के लोनार में है। इस झील का निर्माण करीब 50,000 साल पहले एक उल्कापिंड के पृथ्वी पर गिरने से हुआ था।

Lonar Lake, लोनार झील
Lonar Lake, लोनार झील

लोनार झील का औसत व्यास 1.2 किलोमीटर (3900 फीट) है और यह क्रेटर रिम से लगभग 137 मीटर (449 फीट) नीचे है। उल्का गड्ढा रिम (meteor crater rim) का व्यास लगभग 1.8 किलोमीटर (5900 फीट) है।

स्थानबुलढाणा जिला, महाराष्ट्र, भारत
प्रकारक्रेटर से बनी झील, खारे पानी की झील
उत्पति के समय का नामलोणार सरोवर  (Marathi)
फैलाव1830 मीटर (6,000 ft)
तल क्षेत्रफल1.13 वर्ग किलोमीटर (0.44 sq mi)
औसत गहराई137 मीटर (449 ft)
अधिकतम गहराई150 मीटर (490 ft)

लोनार झील का निर्माण कैसे हुआ

How Lonar Lake was formed – लोनार झील का निर्माण कैसे हुआ? या लोनर झील की उत्पत्ति : लोनार झील डेक्कन ट्रैप में पाई जाने वाले एकमात्र ज्ञात अलौकिक प्रभाव वाली झील है। लोनार झील का निर्माण शुरू में ज्वालामुखी से हुआ माना गया था, लेकिन अब इसे उल्कापिंड के कारण बना हुआ माना जाता है। लोनार झील का निर्माण करीब 50,000 साल पहले एक उल्कापिंड के पृथ्वी पर गिरने से हुआ था।

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लोनार झील का पानी

आपको बता दें की महाराष्ट्र में स्थित लोनार झील का पानी खारा है और जून 2020 की शुरुआत में इसका पानी लाल/गुलाबी रंग में बदल गया था। लोनार झील का पानी के बारे में देश भर के वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने बताया की लोनार झील का पानी का लाल/गुलाबी रंग, लोनार झील के पानी में लवणता बढ़ने और तथा शैवाल की मौजूदगी के कारण हुआ है।

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लोनार झील में पानी कहां से आता है

लोनार झील में पानी का मुख्य स्त्रोत बारिश है। इसके साथ झील के पास स्थित गोमुख मंदिर के पास से एक बारहमासी जलधारा निकलती है, जो झील में ही जाकर मिलती है। लोनार झील में पानी उसके आस पास के पहाड़ों के प्राकृतिक स्त्रोतों से भी आता है।

लोनार झील कहाँ स्थित है

दुनिया के लिए एक रहस्य बन चुकी लोनार झील महाराष्ट्र के लोनर झील (Lonar Lake) महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के लोनार में है। लोनार झील मुंबई से 500 किमी की दूरी पर है। महाराष्ट्र भारत के पश्चिमी घाट पर स्थित एक राज्य है। लोनार झील पर्यटन के लिहाज से भी आज बहुत महत्व रखती है।

Lonar Lake का धार्मिक महत्व

लोनार झील के चारों ओर कई मंदिर हैं, इनमे से अधिकांश आज खंडहर हो चुके हैं। लोनार कस्बे के बीचों बीचों दैत्य सूदन का मंदिर है जो आज सही हालत में बचा है। दैत्य सूदन का मंदिर का निर्माण “लोनसुर पर विष्णु की जीत के सम्मान में” किया गया था। यह प्रारंभिक हिंदू वास्तुकला का एक अच्छा उदाहरण है। विष्णुमंदिर, वाघ महादेव, मोरा महादेव, मुंगेलीचा मंदिर और देवी कमलजा देविया अन्य मंदिर हैं जो झील के क्रेटर के अंदर हैं।

कमलजा देवी मंदिर झील के बगल में स्थित है और इसमें नक्काशीदार चित्र भी हैं। बारिश के मौसम में झील के जल स्तर बढ़ने और गर्मियों में जल स्तर गिरने से इस मंदिर को कोई फ़र्क़ नही पड़ता। क्योंकि यह मंदिर जल स्तर से ऊपर स्थित है। गोमुख मंदिर झील के क्रेटर के रिम के साथ स्थित है। यहाँ से एक बारहमासी जलधारा निकलती है और तीर्थयात्री मंदिर की धारा में स्नान करते हैं। इसे सीता नाहणी मंदिर और धारा भी कहा जाता है।

शंकर गणेश मंदिर, आंशिक रूप से जलमग्न और आयताकार शिव के लिए विख्यात मंदिर। मोथा मारुति मंदिर अंबर क्रेटर झील के पास है, चट्टान से बनी मूर्ति के बारे में माना जाता है कि यह उस उल्का का छींटा है जिससे इस लोनार झील का निर्माण हुआ था।

लोनार झील के पानी का गुलाबी होने के क्या कारण है

जून 2020 की शुरुआत में, लोनार झील का पानी 2-3 दिनों के लिए लाल/गुलाबी हो गया था। प्रारंभिक वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार लोनार झील का जल स्तर कम हो गया। इससे हैलोबैक्टीरियम और डनलिया सेलेना की वृद्धि साथ ही कैरोटीनॉयड स्तर में वृद्धि हुई, जिसके कारण लोनार झील के पानी के रंग में परिवर्तन हुआ।

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Lonar Lake का पारिस्थितिकी तंत्र

Ecosystem of Lonar Lake – लोनार झील की रासायनिक विशेषताए दो अलग-अलग तरह की हैं, ये दोनों अपने स्वयं के वनस्पतियों और जीवों के कारण हैं। पहली झील की बाहरी रासायनिक विशेषता (pH 7) और दूसरी आंतरिक क्षारीय (pH 11)।

Lonar Lake का पारिस्थितिकी तंत्र बहुत विशाल है। यह झील कई तरह के पौधों और जानवरों के जीवन की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए एक आश्रय है। जिनमे काले पंखों वाले स्टिल्ट, ब्राह्मणी बत्तख, ग्रीब्स, शेल्डक (यूरोपीय प्रवासी), फावड़े, चैती, बगुले, लाल-लटके हुए लेविंग्स, रोलर्स या ब्लू जैस, बया बुनकर, परकेट, हूप्स, टेलकबीर, हकीक प्रमुख हैं।

लोनार झील में कई सरीसृप जीव और कई  तरह की छिपकली भी पाई जाती हैं। लोनर झील हजारों मोर, चिंकारा और गज़ेल्स का भी घर है। भारत सरकार ने 20 नवंबर 2015 को लोनर झील के 1.48 वर्ग मील क्षेत्र को “लोनार वन्यजीव अभयारण्य” घोषित कर दिया है।

लोनार झील का इतिहास (History of Lonar Lake)

लोनार झील (Lonar Lake) का सबसे पहले उल्लेख स्कंद पुराण और पद्म पुराण जैसे प्राचीन शास्त्रों में किया गया था। लोनार झील का इतिहास आपको इन्ही पुराणों में मिलेगा।

ऐन-ए-अकबरी (Ain-i-Akbari) दस्तावेज जो 1600 CE में लिखा गया है, उसमें कहा गया कि – ” ये पहाड़ कांच और साबुन बनाने के लिए सभी आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन करते हैं। और यहां नमक उत्पादन का काम भी हो सकता है, जिससे राज्य को काफी राजस्व प्राप्त हो सकता है। इन पहाड़ों पर खारे पानी का झरना है, लेकिन इसके बीच का पानी और किनारों का पानी बिल्कुल ताजा है।”

Lonar Lake पर जाने वाला पहला यूरोपीय

आपको बता दें की लोनार झील (Lonar Lake) पर जाने वाला पहला यूरोपीय 1823 में एक ब्रिटिश अधिकारी “जेई अलेक्जेंडर” था। महाराष्ट्र में बुलढाणा जिला, जहाँ लोनर झील (Lonar Lake) थित है, कभी मौर्य साम्राज्य (Maurya Empire) का हिस्सा था और फिर सातवाहन साम्राज्य (Satavahana Empire) का हिस्सा बन गया।

चालुक्य और राष्ट्रकूटों (Rashtrakutas) ने भी इस क्षेत्र पर शासन किया। मुगलों, यादवों, निज़ाम और अंग्रेजों के काल में इस क्षेत्र का व्यापार काफ़ी समृद्ध हुआ। झील की आस पास पाए जाने वाले कई मंदिरों को यादव मंदिरों के रूप में जाना जाता है साथ ही इन्हें हेमाडपंती मंदिरों (हेमाद्री रामगया के नाम पर) के रूप में भी जाना जाता है।

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अंबर झील (Ambar Lake)

मुख्य झील से लगभग 700 मीटर (2300 फीट) की दूरी पर एक छोटी झील है जिसे Ambar Lake (अंबर झील) के नाम से जाना जाता है. इसके बारे में माना जाता है कि  जो उल्का पिंड गिरा था उसके टुकड़े हुए होंगे और एक छोटा हिस्से से इस Ambar Lake (अंबर झील) निर्माण हुआ होगा.

Ambar Lake (अंबर झील) के पास एक हनुमान मंदिर है, इसमें रखी चट्टान से बनी मूर्ति को अत्यधिक चुंबकीय माना जाता है। स्थानीय किसान अंबर झील (Ambar Lake) का पानी खेती के लिए उपयोग करते हैं। इस झील को छोटी लोनार झील भी कहा जाता है।

लोनार झील के लिए खतरा

लोनार झील किन मानवीय और पर्यावरणीय समस्याओं का सामना कर रही है उसकी जानकारी दी गई है :

  • लोनार झील के चारों ओर कृषि में उर्वरकों, कीटनाशकों और विषाक्त पदार्थों के उपयोग से झील के पानी का प्रदूषण बढ़ रहा है।
  • “धरा” और “सीता नाहणी” बारहमासी धाराएँ हैं जो झील के जल स्रोतों में से एक हैं। उनका उपयोग स्थानीय लोगों, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों द्वारा स्नान, कपड़े धोने और मवेशियों और अन्य घरेलू उद्देश्यों के लिए किया जाता है। डिटर्जेंट वाले घरेलू अपशिष्ट नियमित रूप से इसमें मिलाए जाते हैं।
  • वनों की अवैध कटाई और मवेशियों को चराने से लोनार झील के आस पास प्रदूषण बढ़ रहा है।
  • इलाक़े में अवैध रूप से खनन गतिविधियाँ हो रही हैं। जिससे लोनार झील (Lonar Lake) का भूमिगत जल स्रोत कम होता जा रहा है।
  • सरकार इस लोनर झील (Lonar Lake) को संरक्षित करने के लिए आवश्यक धनराशि नहीं दे पा रही है और अक्सर पर्यटक गतिविधियां पास की भूमि को पर्यावरणीय नुकसान पहुंचाती हैं।
  • कमला देवी उत्सव जैसे स्थानीय त्योहारों के दौरान, बड़ी संख्या में तीर्थयात्री लोनर झील में प्रवेश करते हैं। छोटी दुकानों और भोजन-स्टालों को अक्सर लोनर झील (Lonar Lake) के पास या उसके किनारे लगाया जाता है।
  • आस-पास के शहरों और गांवों के धार्मिक आगंतुक लगातार झील आते हैं। लेकिन वो साइनबोर्ड में लिखे दिशा निर्देशों का पालन नही करते जिससे झील को ख़तरा बढ़ गया है।
  • झील में सीवेज डंप होने के कारण झील का पारिस्थितिकी तंत्र क्षतिग्रस्त हो रहा है।
  • झील के आसपास के क्षेत्र में अवैध निर्माण सहित वाणिज्यिक गतिविधियों ने झील की प्राकृतिक स्थलाकृति को नुकसान पहुंचाया है।
  • 2017 में किए गए एक शोध के अनुसार, “अध्ययन में पाया गया कि लोनार झील (Lonar Lake) के जल स्तर में कमी आस पास के जल स्त्रोतों के सूखने और झील में आने वाली धाराओं के बंद होने का एक संयुक्त परिणाम है”।