सुंदरलाल बहुगुणा किस आंदोलन से संबंधित है?

सुंदरलाल बहुगुणा एक प्रतिष्ठित भारतीय पर्यावरणविद् और समाजसेवी थे, जिन्होंने अपने जीवन को पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सेवा के लिए समर्पित किया। वे विशेष रूप से “चिपको आंदोलन” से संबंधित हैं, जो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आंदोलन था।

सुंदरलाल बहुगुणा किस आंदोलन से संबंधित हैं?

सुंदरलाल बहुगुणा एक प्रमुख भारतीय पर्यावरणविद् थे, जो मुख्य रूप से “चिपको आंदोलन” से संबंधित हैं। यह आंदोलन 1970 के दशक में उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में शुरू हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य वनों की कटाई को रोकना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना था। सुंदरलाल बहुगुणा ने इस आंदोलन के माध्यम से स्थानीय समुदायों को वनों की सुरक्षा के लिए जागरूक किया और महात्मा गांधी के सिद्धांतों का पालन करते हुए अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर चलते हुए वनों की कटाई का विरोध किया। उनके अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप 1980 में भारत सरकार ने वनों की कटाई पर 15 वर्षों के लिए प्रतिबंध लगाया।

चिपको आंदोलन का परिचय

चिपको आंदोलन 1970 के दशक में उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश) में शुरू हुआ था। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य वनों की कटाई को रोकना और पर्यावरण को बचाना था। “चिपको” का अर्थ है “गले लगाना” और यह आंदोलन इसी नाम से इसलिए जाना जाता है क्योंकि इसमें ग्रामीण महिलाएं और पुरुष पेड़ों से गले लगाकर वनों की कटाई का विरोध करते थे।

सुंदरलाल बहुगुणा का योगदान

सुंदरलाल बहुगुणा इस आंदोलन के मुख्य प्रवर्तक थे। उन्होंने वनों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किया। उनका मानना था कि पेड़ केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि समाज की आर्थिक और सामाजिक संरचना के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य योगदान:

  1. शिक्षा और जागरूकता: सुंदरलाल बहुगुणा ने स्थानीय समुदायों को वनों के संरक्षण के लिए शिक्षित किया और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाई।
  2. सत्याग्रह और अहिंसा: उन्होंने महात्मा गांधी के सिद्धांतों को अपनाते हुए सत्याग्रह और अहिंसा का मार्ग चुना। उन्होंने पेड़ों की रक्षा के लिए अनेक बार उपवास किया और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किए।
  3. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान: उनके कार्यों ने चिपको आंदोलन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंचों पर पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों को उठाया और सरकारों पर वनों की कटाई रोकने का दबाव बनाया।

आंदोलन का प्रभाव

चिपको आंदोलन का प्रभाव काफी व्यापक था। इसके परिणामस्वरूप, 1980 में भारत सरकार ने वनों की कटाई पर 15 वर्षों के लिए प्रतिबंध लगाया। इस आंदोलन ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नई दिशा दिखाई और दुनिया भर में पर्यावरण आंदोलनों को प्रेरित किया।

निष्कर्ष

सुंदरलाल बहुगुणा एक महान व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपने जीवन को पर्यावरण और समाज की सेवा में लगा दिया। चिपको आंदोलन के माध्यम से उन्होंने जो योगदान दिया, वह आज भी पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रेरणा स्रोत बना हुआ है। उनके प्रयासों से न केवल वनों की सुरक्षा हुई, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ी।

इस प्रकार, सुंदरलाल बहुगुणा चिपको आंदोलन से संबंधित हैं, जो एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और सामाजिक आंदोलन था। उनका जीवन और कार्य आज भी हमें प्रेरणा देते हैं और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझाते हैं।

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