आज हम आपको CAB यानी Citizenship Amendment Bill (नागरिकता संशोधन विधेयक) के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं? CAB का देश में कई पार्टियों और ख़ासकर मुस्लिम नागरिकों ने काफ़ी विरोध किया था।

CAB क्या है – What is CAB ?

CAB या नागरिकता संशोधन विधेयक का उद्देश्य पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के गैर-मुस्लिमों नागरिकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है। इसके पीछे का कारण है की ये देश मुस्लिम बहुल होने की वजह से यहाँ गैर-मुस्लिमों नागरिकों का सामान्य जीवन भी काफी मुश्किलों में गुजरता है। आए दिन पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की न्यूज आती रहती है। इसी वजह से भारत सरकार इन देशों में बसे हुए गैर-मुस्लिमों नागरिकों को CAB या नागरिकता संशोधन विधेयक के द्वारा भारत की नागरिकता आसान बनाना चाहती है।

CAB या नागरिकता संशोधन विधेयक को 11 दिसम्बर 2019, बुधवार को राज्यसभा में पारित किया गया था। राज्यसभा के 125 सांसदों ने नागरिकता संशोधन विधेयक के पक्ष में और 99 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया था। राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पर मतदान का फैसला छह घंटे की बहस के बाद लिया गया था।

भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) के अलावा, CAB या नागरिकता संशोधन विधेयक को AIADMK, JD(U), BJD, SAD, TDP, और YSR-कांग्रेस का समर्थन मिला था, इससे इस बिल को राज्यसभा में पास कराना आसान हो गया था। हैरानी की बात तो ये है की शिवसेना जो की ख़ुद को हिंदूवादी पार्टी दिखाती है, ने मतदान में भाग नहीं लिया था। इससे पहले CAB यानि नागरिकता संशोधन विधेयक सोमवार (9 दिसम्बर 2019) को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। लोकसभा में 311 सांसदों ने इसके पक्ष में और 80 सांसदों ने CAB (नागरिकता संशोधन विधेयक) के खिलाफ मतदान किया था।

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CAB Full Form

Full Form of CAB is – Citizenship Amendment Bill

CAB Full Form in Hindi

Cab का full form हिंदी में – नागरिकता संशोधन विधेयक है।

भारत की नागरिकता किसको मिलेगी ?

नागरिकता संशोधन विधेयक के कारण अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के गैर-मुस्लिम नागरिकों जैसे हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों, बौद्ध, जैन और पारसी जो 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आ गए थे, उनको भारत की नागरिकता देने का प्रस्ताव है।

CAB की वजह से लाखों प्रवासियों को भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। जो (हिंदु, सिख, ईसाइ, बौद्ध, जैन और पारसी) इनमें से किसी भी धर्म के हों, भले ही उनके पास अपने निवास को साबित करने के लिए कोई भी दस्तावेज ना हो। इसका यह भी अर्थ है कि कोई भी आप्रवासी जो उक्त समुदायों से संबंधित नहीं है, भारतीय नागरिकता के लिए पात्र नहीं होगा।

नागरिकता संशोधन विधेयक के कारण अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के किसी भी अवैध अप्रवासी जो इन समुदायों से संबंधित हैं, अगर उनके पास अपने देश का कोई वैध दस्तावेज नहीं है तो उन्हें जेल नहीं भेजा जाएगा।

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इससे पहले, भारत की नागरिकता प्राप्त करने के लिए इन अप्रवासियों के निवास की अवधि 11 वर्ष थी यानी अगर वो 11 वर्ष तक भारत में रह लेंगे तभी नागरिकता के पात्र हो पाएँगे। नागरिकता संशोधन विधेयक या CAB में इस अवधि को घटाकर 5 साल कर दिया है। इसका मतलब यह है कि 31 दिसंबर, 2014 से पहले तीनों देशों और उल्लिखित धर्मों के वैध या अवैध आप्रवासी सभी भारत की नागरिकता के पात्र हो जाएँगे।

CAB में कुछ छूट भी दी गई है :

North East के कुछ इलाकों और OCI Cardholders को CAB यानि नागरिकता संशोधन विधेयक में कुछ छूट भी दी गई है।

नागरिकता संशोधन विधेयक मेघालय, असम, मिजोरम और त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा क्योंकि ये संविधान की छठी अनुसूची में शामिल है और बंगाल पूर्वी सीमा विनियमन 1873 (Bengal Eastern Frontier Regulation, 1873) के तहत अधिसूचित इनर लिमिट के तहत कवर किया गया क्षेत्र है।

इसका मतलब है कि अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड मिजोरम, लगभग पूरा मेघालय, असम और त्रिपुरा के कुछ हिस्से नागरिकता संशोधन विधेयक के दायरे से बाहर रहेंगे। इसके अलावा, नागरिकता विधेयक में भारत के प्रवासी नागरिकों (OCI Cardholders – ओसीआई कार्डधारकों) को भी छूट दी गई है।

नागरिकता बिल के अनुसार कोई भी विदेशी नागरिक “1955 Act” के तहत भारत में OCI Card के लिए पात्र हो सकता है और पंजीकृत कर सकता है। अगर वह भारत के पूर्व नागरिक या उनके वंशज हैं या भारतीय मूल के व्यक्ति के जीवनसाथी हैं।

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नागरिकता संशोधन विधेयक OCI कार्डधारकों को भारत में यात्रा करने, काम करने और अध्ययन करने जैसे लाभों का अधिकार देता है। यदि कोई OCI कार्डधारक व्यक्ति ने केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी कानून का उल्लंघन किया हो, तो नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) सरकार को ओसीआई पंजीकरण को रद्द करने की अनुमति भी देता है।

विपक्षी पार्टियाँ द्वारा CAB (नागरिकता संशोधन विधेयक) की आलोचना

संसद द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद विपक्षी दल के सांसद इसकी आलोचना कर रहे थे। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष “सोनिया गाँधी” ने कहा कि यह भारत के संवैधानिक इतिहास और बहुलवाद में एक “काला दिन” है और “संकीर्ण सोच और कट्टर ताकतों की जीत” है।

कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया कि पार्टी अभिषेक सिंघवी के साथ नागरिकता विधेयक के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकती है। कानून को निकट भविष्य में कानूनी रूप से चुनौती दी जाएगी क्योंकि यह संवैधानिकता के मामले में “अत्यधिक संदिग्ध” है।

गृह मंत्री अमित शाह द्वारा विधेयक के समर्थन में उनकी टिप्पणी पर निशाना साधते हुए, कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा, “गृह मंत्री का कहना है कि 130 करोड़ लोग हमारा समर्थन कर रहे हैं, जाहिर है कि वह असम, पूर्वोत्तर और अन्य सभी प्रदर्शनकारियों की गिनती नहीं करते हैं।”