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सोन नदी उलटी दिशा में क्यों बहती है, जानिए इसका मुख्य कारण

सोन नदी उलटी दिशा में क्यों बहती है : सोन नदी भारतीय राज्य मध्य प्रदेश से निकलती है और उत्तर प्रदेश, झारखंड की पहाड़ियों से गुजरती है और बिहार के ज़िला वैशाली के सोनपुर में गंगा नदी में मिलती है। सोन नदी को बिहार की प्रमुख नदी माना जाता है। सोन नदी की लम्बाई 781 किमी है और इसके बाद यह नदी गंगा के साथ मिलकर आगे गंगा के नाम से जानी जाती है।

मध्य प्रदेश के अमरकंटक पहाड़ी से निकलने वाली सोन नदी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन दायनी नदी है. इसके आस पास का पूरे क्षेत्र का जीवन इसी नदी पर टिका हुआ है. खेती किसानी इसी सोन नदी के भरोसे होती है. सोन नदी की सहायक नदी रिहंदी नदी पर बना रिहंद बांध महत्वपूर्ण है।

इस नदी का सोन है इसके पीछे एक कारण ये है की सोन नदी की रेत का रंग पीला होता है, जो सोने की तरह चमकता है। सोन नदी को स्वर्ण नदी के रूप में भी जाना जाता है। आपको बता दें की सोन नदी से निकलने वाले रेत की माँग पूरे भारत में होती है, सोन नदी की रेत भवन निर्माण जैसे कामों में सबसे बेहतर मानी जाती है।

सोन नदी के रेत का उपयोग बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश में मुख्य रूप से भवन निर्माण के लिए किया जाता है. गंगा और सोन नदी के संगम वाले सोनपुर में एशिया का सबसे बड़ा सोनपुर पशु मेला लगता है।

सोन नदी उलटी दिशा में क्यों बहती है

सोन नदी का उत्तर की ओर बहने का कोई विशेष कारण नही है. सोन नदी मौसमी नदी है इसलिए इसकी परिवहन की दिशा बिलकुल महत्त्वहीन है। फिर भी अगर आपका सवाल ये है की यह नदी उलटी दिशा में क्यूँ बहती है? तो आपको बता दें की दुनिया में ऐसी कोई नदी नही है जो उलटी दिशा में बहती हो, लेकिन कुछ प्राकृतिक कारण होते हैं जिससे हमें लगता है की नदी उलटी दिशा में बह रही है।

जैसे सोन नदी को देख कर हमें लगता है की यह उत्तर की ओर उलटी दिशा में कैसे बहती है, जबकि भारत का उत्तरी भाग तो ऊँचा है। आम धारणा के विपरीत आपको बता दें की दुनिया की कोई भी नदी ऐसी नही है जो कम ऊँचाई वाले क्षेत्र से ज़्यादा ऊँचे क्षेत्र की ओर बहे. यह तो एक तरह से यह कहना हुआ की नदी पहाड़ चढ़ रही है। नदी के बहाव के लिए कुछ प्राकृतिक और भौगोलिक कारण होते हैं, इन्ही दोनो परिस्थिति और नदी के बहाव की गति के ऊपर बहाव की दिशा निर्भर करती है।

सोन नदी उलटी दिशा में क्यों बहती है
सोन नदी उलटी दिशा में क्यों बहती है

कई बार ऐसा होता है की नदी जिस जगह से निकलती है, वहाँ कुछ परिवर्तन होते हैं. जैसे की अचानक कोई आपदा आना, शहर बसाना या कोई मानवीय कारण, जिसके कारण नदी के परवाह की गति और दिशा में बदलाव आता है.

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जैसे की 2005 मे आए कटरीना चक्रवात और 2012 मे आए issac चक्रवात के कारण मिसिसिप्पी नदी उलटी दिशा में बहने लगी थी. मिसिसिप्पी नदी का उलटी दिशा में बहाव  सिर्फ़ 24 घंटे तक ही था. लेकिन यह प्राकृतिक आपदा और भूस्खलन के कारण हुआ था.

सोन नदी के उलटी दिशा “उत्तर की ओर” बहने का कोई विशेष कारण नही है. यह सिर्फ़ अपने मार्ग में बहती है. आप इसका एक उदाहरण ले सकते हैं की अगर आप एक ग्लास पानी कहीं गिरा दें तो वह पानी या तो सुख जाएगा या फिर जिस तरह का क्षेत्र नीचे होगा उसी तरफ़ जाएगा. इसी तरह आप सोन नदी को समझ सकते हैं. सोन नदी को भी ऐसे ही समझे की नदी को उसके बहाव के लिए जहाँ से रास्ता मिला, जहाँ का भी क्षेत्र उसके लिए अनुकूल था (यानी नीचे तह) वही से वह आगे बढ़ती चली गई.

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लेकिन आपको ये पता होना चाहिए की पहाड़ों के टूटने, नदी के तल में कचरा और गाद जमा होने, भूमिगत बदलाव होने से नदी के बहाव की दिशा हमेशा बदलती रहती है. लेकिन यह धीमी प्रक्रिया होती है, इसलिए ज़्यादातर हमें इसकी जानकारी नही हो पाती.

सोनपुर पशु मेला

सोन नदी और गंगा नदी बिहार के जिस जाग सोनपुर में मिलती है यानी दोनो नदियों के संगम पर एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला हर साल लगता है. इस मेले को सोनपुर पशु मेले के नाम से पूरी दुनिया में जाना जाता है.

सोन नदी के बारे में महत्वपूर्ण बातें-

  • सोन नदी मध्यप्रदेश के अमरकंटक पहाड़ी के मैकाल पर्वत से निकलती है. यह एक पठारी  क्षेत्र है.
  • सोन नदी को स्वर्ण नदी, सोनभद्र और हिरण्यवाह के नाम से भी जाना जाता है.
  • सोन नदी को गंगा की सहायक नदी माना जाता है.
  • सोन नदी मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार की मुख्य नदी के रूप में जानी जाती है.
  • सोन नदी झारखण्ड के उत्तरी-पश्चिमी किनारे में झारखण्ड की सीमा का निर्धारण करती है.
  • सोन नदी जिस क्षेत्र से बहती है उसका ज़्यादातर हिस्सा कम जनसंख्या वाला और वनों से घिरा हुआ है.
  • सोन नदी की रेत भवन निर्माण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. भवन निर्माण के लिए बेहतर रेत होने के कारण सोन नदी से बहुत ज़्यादा रेत निकाला जाता है. जो की मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार की ज़रूरत पूरी करता है.
  • सोन नदी अमरकंटक से निकलने से लेकर गंगा नदी में मिलने तक 781 किमी बहती है. यानी सोन नदी की लम्बाई 781 किमी है.
  • सोन नदी की कई सहायक नदियाँ हैं लेकिन इनमें से दो मुख्य नदी हैं इनका नाम रिहन्द नदी और कुनहड नदी है.
  • सोन नदी और इसकी कई सहायक नदियों में बाँध का निर्माण किया गया है. साथ ही उत्तर प्रदेश में अभी एक और  बाँध का निर्माण का प्रोजेक्ट ‘डेहरी ऑन सोन नहर प्रणाली’ का काम चालू है.
  • सोन नदी का सबसे महत्वपूर्ण बाँध “डेहरी” है. डेहरी बाँध का निर्माण 1874 में किया गया था.
  • सोन नदी के संगम सोनपुर में एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला लगता है.
  • सोन नदी पर तीन महत्वपूर्ण पुल बनाएँ गए हैं. इनमें से एक पुल की लम्बाई तीन मील है. यह पुल डेहरी-ऑन-सोन पर बनाया गया है.
  • सोन नदी मौसमी नदी है यानी बारिश के पानी पर जीवित रहने वाली नदी.
  • सोन नदी मध्य प्रदेश से निकल कर मानपुर तक उत्तर की दिशा में बहती है. इसके बाद सोन नदी पूर्वोतर दिशा में मुड़ जाती है.
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आशा है की आपको अपने सवाल “सोन नदी उत्तर की ओर बहने का क्या कारण है?” का जवाब मिल गया होगा।

सोन रिवर कहाँ से निकलती है?

अमरकंटक

सोन नदी कितने राज्यों से होकर गुजरती है?

सोन नदी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार राज्यों से होकर बहती है।

सोन नदी की कुल लंबाई कितनी है?

784 कि.मी.

सोन के उद्गम को क्या कहते हैं?

सोन नदी का उदगम मैकाल पर्वत के अमरकण्टक नामक पठारी भाग से है। इसे ‘सोनभद्र’ के नाम से पुकारा जाता है। सोन नदी का एक अन्य नाम ‘हिरण्यवाह’ भी है। यह नदी झारखण्ड के उत्तरी-पश्चिमी छोर पर सीमा का निर्माण करती है।

सोन नदी की सहायक नदियाँ कौन कौन सी है?

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