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दुनिया में सबसे गहरा छेद – Deepest Hole in the World – Kola Superdeep Borehole (कोला सुपरदीप बोरहोल)

Kola Superdeep Borehole : सोवियत वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की सतह में गहराई तक खोदा था, वो इतना गहराई तक खोद दिए थे जितना आज तक किसी ने कभी नहीं किया। जिसके परिणाम स्वरूप पृथ्वी पर दुनिया का सबसे गहरा छेद (Deepest Hole in the World) बना, जो रूस में कोला प्रायद्वीप पर स्थित कोला सुपरदीप बोरहोल (kola superdeep borehole) है।
Deepest Hole in the World - Kola Superdeep Borehole
Deepest Hole in the World की महत्वाकांक्षी परियोजना 1970 के दशक में शुरू हुई, और पूर्व सोवियत संघ में वैज्ञानिकों ने एक ड्रिल करना शुरू किया जो कि सिर्फ 9 इंच (22.9 सेमी) व्यास का था। अंततः पृथ्वी में 7.5 मील (12.1 किमी) अंदर तक वो इस होल को करते चले गए, जो  पृथ्वी में अब तक का सबसे गहरा छेद है। एक और छेद प्रशांत महासागर में मैरिएंस खाई में चैलेंजर डीप 6.8 मील (10.9 किमी) जितना गहरा है।

वैज्ञानिकों ने क्या सीखा और उन्होंने इन अविश्वसनीय गहराईयों पर क्या पाया?

उन्होंने 4.3 मील (6.9 किमी) नीचे एकल-कोशिका वाले प्लवक जीव पाए, और लगभग उसी गहराई पर, उन्होंने पानी की खोज की। उन्होंने यह भी पता लगाया कि तापमान छेद के तल पर 356°F (180°C) तक पहुंच गया, जो उनके अनुमान से अधिक था। यही कारण था कि छेद को 1994 में बंद कर दिया गया था। ड्रिलिंग जारी रखने के लिए छेद बहुत गर्म था। गर्म परिस्थितियों के कारण पर्यावरण अधिक गर्म हो गया, और बोरहोल को बनाए रखना अधिक कठिन था। इसके अलावा, इसने उपकरणों को बहुत जल्दी बर्बाद कर दिया।
लेकिन वैज्ञानिक लगभग 4,000 मील (6,347 किमी) पृथ्वी के केंद्र की दूरी का अधिक सटीक अनुमान लगाने में सक्षम थे। यह छेद मुश्किल से इसे पृथ्वी की ऊपरी सतह को भी नही पर कर पाया, जो लगभग 23 मील (37 किमी) मोटी है। हालाँकि उनका लक्ष्य था  पृथ्वी के कोर तक छेद करना, जो क्रस्ट के नीचे लगभग 1,800 मील (2,896 किमी) मोटी है।

मैक्सिको के ग्वाडालूप के तट पर प्रोजेक्ट : Deepest Hole in the World

कोर तक पहुचने का पहला प्रयास 1958 में मैक्सिको के ग्वाडालूप के तट पर हुआ, जो कि प्रोजेक्ट मोहोल नामक प्रशांत महासागर में था। अमेरिकी इंजीनियरों ने 11,700 फीट (3,566 मीटर) पानी में ड्रिल किया और सीफ्लोर के नीचे 601 फीट (183 मीटर) छेद किया। पैसों की कमी से यह परियोजना 1966 में बंद कर दी गई।

जर्मन कॉन्टिनेंटल डीप ड्रिलिंग कार्यक्रम : Deepest Hole in the World

अगला बड़ा प्रयास 1987 से 1995 तक हुआ जब बवेरिया में जर्मन वैज्ञानिकों द्वारा जर्मन कॉन्टिनेंटल डीप ड्रिलिंग कार्यक्रम शुरू किया गया। वे लगभग 5.7 मील (9.2 किमी) नीचे जाने में कामयाब रहे और तापमान की खोज की जो 600°F (316°C) तक पहुंच गई। ये प्रोजेक्ट भी पैसों की कमी के कारण बंद हो गया।

Japan Project :Deepest Hole in the World

चूँकि पृथ्वी की ऊपरी सतह समुद्र तल के नीचे पतली होती है, यहीं पर गहराई तक खोदने की अगली कोशिश की गई। एक विशेष जापानी ड्रिल जहाज चिकू, ने समुद्र के नीचे लगभग 2 मील (3.2 किमी) पर वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले सबसे गहरे अपतटीय छेद का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। चीकू का उपयोग करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय टीम अब और गहराई तक जाने का प्रयास कर रही है। इंटीग्रेटेड ओशन ड्रिलिंग प्रोग्राम 2003 में शुरू किया गया था और यह पृथ्वी के केंद्र में जाने की कोशिश कर रहा है, जहाँ तापमान 1,600°F (871°C) से शुरू हो सकता है। कार्यक्रम में कई साल लगेंगे, और इसकी लागत $1 बिलियन तक पहुंच सकती है।
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