Double Marker Test – डबल मार्कर टेस्ट क्या है? Results & Cost, Normal Range, Indications

What is Double Marker Test?

गर्भावस्था हर महिला के लिए ख़ुशी का पल होता है। Pregnancy के दौरान gynaecologist (स्त्रीरोग विशेषज्ञ) से consult करना ज़रूरी होता है ताकि पता लगाया जा सके की माँ और भ्रूण में कोई समस्या तो नही है। इसके लिए कई Test (परीक्षण) होते हैं। पोषक तत्वों के स्तर की जांच, आपके बच्चे के विकास की प्रगति की जांच और संभावित आनुवंशिक विषमता की जांच करने के लिए कई Test (परीक्षण) होते हैं।

Double Marker Test

Double Marker Test – प्रेग्नेंसी के दौरान मां के पेट में पल रहे भ्रूण में किसी भी तरह की क्रोमोसोमल (Chromosomal) विषमता/असमानता का पता लगाने के लिए डबल मार्कर टेस्ट (Double Marker Test) किया जाता है। प्रेग्नेंसी शुरू होने से लेकर 3 महीनों के दौरान डबल मार्कर टेस्ट (Double Marker Test) किया जाता है। Double Marker Test भ्रूण में किसी भी तरह की क्रोमोसोमल विषमता/असमानता को पहचानने में मदद करता है।

पूरी दुनिया में 700 बच्चों में से 1 बच्चा Chromosomal विषमता से साथ जन्म लेता है। Double Marker Test आपको अपने होने वाले बच्चे में Chromosomal विषमता का पता लगाने में मदद करता है, ताकि आप यह पता लगा सकें की आपके बच्चे में  Down syndrome (Trisomy 21), Edwards syndrome (Trisomy 18) जैसे किसी भी तरह का मानसिक विकार का खतरा तो नही है। यह क्रोमोसोमल असमानता के कारण होते हैं। जन्म के बाद क्रोमोसोमल असमानता के कारण बच्चे के लिए गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

double marker test report analysis

डबल मार्कर स्क्रीनिंग टेस्ट वह है जो गर्भावस्था की पहली तिमाही (10वें से 13वें सप्ताह के बीच) में किया जाता है। इसके लिए Blood Sample लिया जाता है ताकि 3 hCG (human chorionic gonadotropin hormone) और PAPP-A ( pregnancy – associated plasma protein) का पता लगाया जा सके। इन परीक्षण से बच्चे में डाउन सिंड्रोम की संभावना का पता लगाया जाता है। 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में Double Marker Test करवाना ज़रूरी होता है। क्योंकि माँ की age अधिक होने पर बच्चे में डाउन सिंड्रोम होने की संभावना बढ़ जाती है।

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आज हम चर्चा करेंगे डबल मार्कर परीक्षण का महत्व –

Down syndrome – डाउन सिंड्रोम क्या है?

चिकित्सा जगत में डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) को ट्राईसोमी आनुवांशिक विकार (trisomy genetic disorder) के रूप में जाना जाता है। प्रत्येक कोशिका 46 गुणसूत्रों (chromosomes) से बनी होती है, ये गुणसूत्रों के 23 जोड़े होते हैं। भ्रूण की दो कोशिकाओं को बनाने के लिए पूरे 23 गुणसूत्रों के साथ (शुक्राणु और अंडाणु) को एकजुट करना होगा  तब 46 chromosomes बनते हैं, जो बाद में भ्रूण बन जाता है। कुछ मामलों में cell division के दौरान, गुणसूत्र की एक अतिरिक्त जोड़ी किसी chromosome pairs में जुड़ जाती है। तब उसमें दो chromosomes की बजाय तीन chromosomes हो जाते हैं। डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) में, 21 वीं जोड़ी में दो की बजाय तीन गुणसूत्र हो जाते हैं। इससे आगे चल कर होने वाला बच्चा कुछ विसंगतियों के साथ जन्म लेगा।

डबल मार्कर परीक्षण (Double marker test) द्वारा इस condition की पहचान की जा सकती है।

Double marker test द्वारा इसके अलावा भी कई और problems को पहचान करने में भी मदद करता है जैसे कि Edward syndrome (trisomy of chromosome 18), trisomies, Patau syndrome (trisomy of chromosome 13) लेकिन ये काफी दुर्लभ होते हैं इसलिए इनके बारे में आम तौर पर बात नही की जाती है। इसलिए हम सिर्फ़ आज Double marker test के बारे में बात करेंगे।

Double marker test क्यों करवाना चाहिए हैं?

pregnant महिलाओं preganacy की पहली तिमाही में डबल मार्कर स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना पड़ता है। कुछ कारक हैं जो बच्चे में Down syndrome या अन्य आनुवंशिक problems की संभावना बढ़ा देते हैं – इसमें शामिल है:

  • महिला की उम्र 35 साल से अधिक होने पर होने वाले बच्चे में Down syndrome की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • महिला को diabetes हो।
  • पिछला बच्चा डाउन सिंड्रोम (या समान आनुवंशिक) के साथ पैदा हुआ हो।
  • जन्म दोष का पारिवारिक इतिहास
  • IVF pregnancy
  • गर्भावस्था के दौरान महिला वजन
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normal डबल मार्कर test का normal result क्या दिखता है?

याद रखने वाली पहली बात यह है कि यह एक स्क्रीनिंग टेस्ट है। इस इसका मतलब यह है कि भले ही एक सकारात्मक परिणाम दिखाया गया है इसका मतलब यह नहीं है कि आपके बच्चे को डाउन सिंड्रोम है।
स्क्रीनिंग टेस्ट का  उद्देश्य यह पता लगाने के लिए है कि क्या और अधिक महंगा परीक्षण करवाने की आवश्यकता है या नहीं।
अगर hCG value 25700 – 288000 mlU / ml है तो यह सामान्य माना जाता है।
गर्भावस्था के 8 से 12 सप्ताह के बीच एक सामान्य PAPP 0.5 MoM से अधिक होता है।

क्या डबल मार्कर टेस्ट खाली पेट किया जाता है?

नहीं, यह आवश्यक नहीं है। हालांकि, अगर महिला किसी तरह की medicines ले रही हैं तो Test से पहले ना लें।

डबल मार्कर टेस्ट कैसे किया जाता है?

डबल मार्कर टेस्ट में प्रेग्नेंट महिला का Blood Test और Ultra sound Test किया जाता है। Blood Sample लेने के बाद 2 और मुख्य Test किए जाते हैं। जिसमें महिला के शऱीर में प्रोटीन और हार्मोन की जांच की जाती है।

Double Marker के ख़तरे क्या हैं?

Double Marker टेस्ट महिला के Blood से किया जाता है। इस कारण उस महिला अथवा उसके भ्रूण को कोई ख़तरा नही होता है।

क्या होगा यदि मेरा Test Result सामान्य के भीतर नहीं हो?

पहली तिमाही के दौरान, hCG level तेजी से बढ़ता है। इसके बाद स्तर गिरने लगता है। तब तक ऐसा नहीं है। तब तक यह असामान्य नही है जब तक की hCG level हजार से ऊपर ना हो। सामान्य सीमा से बाहर की वृद्धि को मार्कर के रूप में जोड़ा गया है जो की डाउन सिंड्रोम जैसी संभावित आनुवंशिक स्थितियां हो सकती हैं।

hCG का उच्च स्तर twin pregnancies (जुड़वां गर्भधारण), molar pregnancies और जो महिलाएँ fertility medications लेती हैं उनमे भी पाया जाता है।

3 hCG value और PAPP – A value होना double marker screening test में positive माना जाता है। जब Doctor यह Test देखता है तो वह genetic condition diagnose करने के लिए आगे के tests के लिए कहता है।
इन test में amniocentesis और chorionic villus sampling शामिल हैं।

Double marker test के साथ कोई और टेस्ट भी किया जाता है?

डबल मार्कर टेस्ट लेते समय अधिकांश डॉक्टर डाउन सिंड्रोम के बढ़ते जोखिम को जाँचने के लिए ultrasonographically भी करते हैं। ये आमतौर पर NT test या nuchal translucency test के रूप में जाना जाता है। यह एक ultrasonographic marker है जो 3 hCG और pApp A3 के साथ combination में उपयोग किया जाता है।
Nuchal translucency मूल रूप से आपके baby की neck में मौजूद द्रव (fluid) की मात्रा को मापता है यह test कोई significant results नहीं देता है।
हालांकि, दोनो को साथ करने में Down syndrome पता लगाने की सटीकता लगभग 75 – 80% तक बढ़ जाती है। मार्कर स्क्रीनिंग टेस्ट। 3.5 mm से कम का NTvalue को सामान्य माना जाता है।

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इस प्रक्रिया के फायदे और नुकसान क्या हैं?

चूंकि यह परीक्षण पहली तिमाही में आयोजित किया जाता है, इसलिए यह प्रारंभिक screening test है जो आनुवंशिक स्थितियों का आकलन करने में मदद करता है। इससे आपको आगे के स्क्रीनिंग परीक्षणों पर निर्णय लेने का पर्याप्त समय मिल जाता है।

डबल मार्कर परीक्षण की लागत कितनी है? How much does the double marker test cost?

यह बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि आप परीक्षण कहाँ करवाते हैं। कुछ छोटे Lab 1300 रुपए तक charge करते हैं लेकिन advance lab में इसका charge 5000 रुपए तक हो सकता है।

double marker test cost – डबल मार्कर टेस्ट कॉस्ट

India में हर शहर में डबल मार्कर टेस्ट की कीमत अलग अलग है जैसे की :-

double marker test cost in Delhi : 1425 ₹
double marker test cost in Mumbai : 1460 ₹
double marker test cost in Chennai : 1200 ₹
double marker test cost in Hyderabad : 1200 ₹
double marker test cost in Noida : 1425 ₹
double marker test cost in Bangalore : 1200 ₹

Note – गर्भावस्था के दौरान हर परीक्षण का अपना महत्व होता है। प्रत्येक परीक्षण के बाद उसके हानि और लाभ के बारे में अपने gynaecologist Doctor से चर्चा करें। जब आप Test Result प्राप्त करते हैं तो किसी भी तरह के संदेह के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। अगर Test Positive है तो Doctor द्वारा पुष्टि करने तक प्रतीक्षा करें। Screening Test का Result शायद ही कभी सकारात्मक निकले। लेकिन फिर भी किसी भी Result का सकारात्मक या नकारात्मक आना आपके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए इन Test को करवाते समय अपने Husband या परिवार के किसी सदस्य को साथ ले जाएँ।

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