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Project A119: अमेरिका की चांद को परमाणु बम से उड़ाने की गुप्त योजना का ख़ुलासा

Project A119, the black vault

शीत युद्ध के समय अमेरिका की योजना चाँद पर परमाणु विस्फोट करने की थी। अमेरिका की इस गुप्त योजना का नाम Project A119 था।

शीत युद्ध के भू-राजनीतिक विवाद में दोनों देश लगभग 50 वर्षों तक एक दूसरे से उलझे रहे। शीत युद्ध के समय संयुक्त राज्य अमेरिका और पूर्व सोवियत संघ दोनो दुनिया को अपनी शक्ति दिखाना चाहते थे, इसलिए दोनों स्पेस रेस में भी शामिल हो चुके थे।

1925 में सोवियत संघ ने अपने पहले उपग्रह स्पुतनिक-1 को लॉन्च किया था। इसके बाद अमेरिका और सोवियत संघ के बीच स्पेस रेस भी काफ़ी आगे बढ़ चुकी थी।

शीत युद्ध को कई साल हो चुके हैं, लेकिन इससे जुड़ी चीजें अलग-अलग तरीक़ों से सामने आती रहती हैं। उस समय अमेरिका और सोवियत संघ के बीच संबंध बहुत खराब थे।

दोनों देशों के बीच बेहतर दिखाने की होड लगी हुई थी। ऐसे में दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ कोई भी क़दम उठाने से पीछे नही हट रहे थे। हाल ही में प्रकाशित पुस्तक “Black Vault” में शीत युद्ध के युग के लिए एक चौंकाने वाला दावा किया गया है। “Black Vault” किताब इसी साल अप्रैल में प्रकाशित की गई थी। इस “Black Vault” किताब के लेखक “जॉन ग्रीनवाल्ड जूनियर” हैं।

Black Vault” कुछ दिन पहले ही पब्लिश हुई किताब है। इसी “Black Vault” किताब में अमेरिका के इस ख़तरनाक गुप्त योजना “Project A119” की जानकारी दी गई।

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1959 में अमेरिका ख़ुद को सोवियत संघ से आगे दिखाने के लिए और ख़ुद को महान साबित करने के लिए चाँद पर एक सैन्य अड्डा शुरू करने की योजना के साथ चाँद पर परमाणु विस्फोट की गुप्त योजना पर भी काम कर रहा था।

अमेरिकी सेना में उस समय के “लेफ्टिनेंट आर्थर जी. ट्रूडो” जो की “अनुसंधान और विकास प्रमुख” थे के प्लान का ख़ुलासा “सीक्रेट्स फ्रॉम द ब्लैक वॉल्ट” किताब में किया गया। ट्रूडो की योजना थी की अमेरिका को ख़ुद को महान दिखाना है और मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करनी है तो उसे चाँद पर अपना एक सैन्य अड्डा बनाने के साथ एक परमाणु विस्फोट करना चाहिए। अमेरिका ने इस गुप्त योजना का नाम “Project A119” रखा था। रिपोर्ट के अनुसार “Project A119” पर उस समय 6 अरब डॉलर ख़र्च होने का अनुमान लगाया गया था, जो की आज के हिसाब से 53 अरब डॉलर होता है। अमेरिका के “Project A119” के अनुसार चाँद पर 12 लोगों की एक सैन्य चौकी बनाने की योजना बनाई गई थी।

सीक्रेट्स फ्रॉम द ब्लैक वॉल्ट किताब में अमेरिका के Project A119 के बारे में ख़ुलासा किया गया। जॉन ग्रीनवाल्ड जूनियर के अनुसार चाँद पर परमाणु विस्फोट की योजना अब तक की सबसे बड़ी मूर्खतापूर्ण बात थी। द ब्लैक वॉल्ट की एक वेबसाइट भी है जिसमें लगभग 3 हजार खुफिया सूचनाओं को पब्लिश किया गया है।

आपको बता दें की सीक्रेट्स फ्रॉम द ब्लैक वॉल्ट किताब के लेखक जॉन ग्रीनवाल्ड जूनियर की रुचि बचपन से ही अमेरिकी की खुफिया जानकारियों पर थी, तो उन्होंने 15 साल की उम्र से ही इसमें काम करना चालू कर दिया था।

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Project A119 : अमेरिका के इस गुप्त मिशन का कोड नेम “Project A119” रखा गया था। इस Project A119 के अनुसार अगर सब कुछ चलता तो अमेरिका द्वारा चाँद पर किया गया परमाणु विस्फोट धरती से दिखाई देता।

सोवियत संघ से अंतरिक्ष की दौड़ में आगे दिखने के लिए अमेरिका ने इस Project A119 को अपने एयरफोर्स के कीर्टलैंड एयरफोर्स बेस (मेक्सिको) में शुरू किया था।

अमेरिका की योजना सिर्फ़ परमाणु विस्फोट तक ही नही थी बल्कि वह इससे भी आगे बढ़ गया था। अमेरिकी सेना चाहती थी की चाँद पर किया गया परमाणु विस्फोट धरती से दिखाई दे, इसके लिए उसकी योजना परमाणु बम में सोडियम भरने की थी। सोडियम भरने से परमाणु विस्फोट ज़्यादा चमकीला दिखाई देता, यही वजह से थी Project A119 के लिए अमरीकी सेना इसमें सोडियम भरना चाहती थी।

‘ए स्टडी ऑफ लूनर रिसर्च फ्लाइट्स‘ नाम से एक रिपोर्ट 1959 में प्रकाशित की गई थी, उस रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेरिका के गुप्त प्लान Project A119 की योजना के अनुसार अमेरिका चंद्रमा के टर्मिनेटर पर परमाणु विस्फोट करना चाहता था। चाँद की सतह का वह हिस्सा जहाँ सूरज की रोशनी पड़ती है और चाँद का वह हिस्सा जहाँ सूरज की रोशनी नही पड़ती, उन दोनों के बीच के हिस्से को चंद्रमा का टर्मिनेटर कहा जाता है।

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शीत युद्ध के समय दोनों देश की बीच ऐसी होड़ मची थी की दोनों कुछ भी करने के लिए तैयार थे। ऐसे में सोवियत संघ के पहले उपग्रह स्पुतनिक-1 को लॉंच करने के बाद अमेरिका ने अभी अपना एक उपग्रह एक्सप्लोरर 1 लॉन्च किया था। अमेरिका की योजना Project A119 के साथ ही चाँद पर मानव बस्ती बनाने की भी थी, लेकिन कुछ समस्याओं के चलते इसे भी रोक दिया गया था।

इसके बाद उसने Project A119 पर ध्यान देना शुरू किया ताकि ख़ुद को महान दिखा सके। लेकिन कुछ समय बाद अमेरिका की अक़्ल का पर्दा हटा और वो Project A119 “चाँद पर परमाणु विस्फोट करने की योजना” से पीछे हट गया। इसके पीछे कारण था अमेरिका का डर की कहीं परमाणु बम ले जाने वाली मिसाइल चाँद पर ना जाकर रास्ते से भटक जाए और धरती पर ही गीत जाए तब क्या होगा।

अमरीकी कांग्रेस ने भविष्य में इस तरह की चीज को रोकने के लिए दो विधेयक पारित किए, जिनमें से पहला 1963 में आंशिक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि थी। 1967 में, इसने इस तरह के आक्रामक व्यवहार को रोकने के लिए एक अन्य विधेयक, आउटर स्पेस ट्रीटी को पारित किया। इसके बाद अक्टूबर 2018 तक, 107 देशों ने संधि पर सहमति व्यक्त करके अंतरिक्ष को हथियार मुक्त करने का आह्वान किया।

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